भागवत ज्ञान की अमृतधारा में डूबे श्रद्धालु, भक्ति और सदाचार के संकल्प के साथ कथा का भव्य समापन

हवन-पूर्णाहुति के साथ सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा संपन्न, संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद

हरिद्वार। भूपतवाला स्थित श्री राम कृपा धाम ट्रस्ट में 24 सितंबर से चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच भव्य समापन हुआ। कथा के अंतिम दिवस कथा व्यास परम पूज्य साध्वी डॉ. विश्वेश्वरी देवी ने श्रीमद्भागवत के दिव्य प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान, सत्य और सदाचार का संदेश दिया। सात दिनों तक चली कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भागवत ज्ञान की अमृतधारा में गोते लगाकर अपने जीवन को आध्यात्मिक ऊर्जा से अभिसिंचित किया।

साध्वी डॉ. विश्वेश्वरी देवी सनातन धर्म की केवल एक कथा व्यास नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और भारतीय धर्म परंपरा की एक सशक्त पहचान हैं। उनका जीवन सनातन धर्म के प्रति निस्वार्थ समर्पण, सेवा और भक्ति का उदाहरण है। अपनी ओजस्वी वाणी और सरल आध्यात्मिक संदेशों के माध्यम से वह श्रीमद्भागवत के ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने का निरंतर प्रयास कर रही हैं। उनके प्रवचनों में शास्त्रों का ज्ञान ही नहीं, बल्कि मानव जीवन को संस्कार, सेवा, सदाचार और ईश्वर भक्ति से जोड़ने का भाव भी स्पष्ट दिखाई देता है।

समापन अवसर पर विधि-विधान के साथ हवन एवं पूर्णाहुति का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुतियां अर्पित कर विश्व कल्याण, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। हवन-पूर्णाहुति के पश्चात संत-महात्माओं के लिए भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें संत समाज ने प्रसाद ग्रहण किया। इसके साथ ही श्रद्धालुओं को भी प्रसाद वितरित किया गया।

कथा व्यास साध्वी डॉ. विश्वेश्वरी देवी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि जीवन को परमात्मा की भक्ति, सत्य और सदाचार के मार्ग पर ले जाने वाली दिव्य साधना है। भगवान के नाम का स्मरण, सत्संग और संतों का सानिध्य मनुष्य के जीवन को पवित्र बनाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि कथा के दौरान प्राप्त आध्यात्मिक संदेश को केवल कथा पंडाल तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने व्यवहार और जीवन में उतारें।

उन्होंने कहा कि जब मनुष्य के हृदय में भगवान के प्रति श्रद्धा और विश्वास जागृत होता है, तो भय, अहंकार और नकारात्मक विचारों का क्षय होने लगता है। भागवत कथा का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य को भक्ति, सेवा और सद्कर्म के मार्ग पर आगे बढ़ाते हुए उसके जीवन को सार्थक बनाना है।

सात दिवसीय कथा के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का श्रवण करने पहुंचे। कथा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने संत-महात्माओं, कथा व्यास साध्वी डॉ. विश्वेश्वरी देवी एवं श्री राम कृपा धाम ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया। हवन-पूर्णाहुति, संत भंडारे एवं प्रसाद वितरण के साथ सात दिवसीय धार्मिक आयोजन का श्रद्धा और भक्तिभाव से विधिवत समापन हुआ।

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