स्वामी तुरीयानन्द जी महाराज का 151वां अवतरण दिवस श्रद्धा और हर्षोल्लास से मनाया

स्वामी तुरीयानन्द जी महाराज का 151वां अवतरण दिवस श्रद्धा और हर्षोल्लास से मनाया

विशाल संत सम्मेलन में संत समाज ने प्रवचनों से संगत को किया निहाल, भव्य भंडारे का भी हुआ आयोजन
हरिद्वार।स्वामी तुरीयानन्द सत्संग सेवा आश्रम, पुराना ऋषिकेश रोड, पीली कोठी के सामने, भूपतवाला, हरिद्वार में ब्रह्मलीन श्रीश्री 1008 स्वामी तुरीयानन्द जी महाराज के 151वें अवतरण दिवस महोत्सव के उपलक्ष्य में शनिवार, 29 अगस्त 2026 को विशाल संत सम्मेलन का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ किया गया। कार्यक्रम गद्दीनशीन श्रीश्री 1008 स्वामी विवेकानन्द गिरि जी महाराज के संरक्षण में भव्य रूप से सम्पन्न हुआ।

संत सम्मेलन में हरिद्वार नगर के विभिन्न अखाड़ों, आश्रमों एवं संत समाज से पधारे महामंडलेश्वरों, महंतों एवं विद्वान संतों ने अपने आध्यात्मिक प्रवचनों के माध्यम से दूर-दूर से आई श्रद्धालु संगत को धर्म, गुरु भक्ति और आध्यात्मिक जीवन का संदेश देते हुए अमृतवाणी से निहाल किया।

इस अवसर पर गद्दीनशीन श्रीश्री 1008 स्वामी विवेकानन्द गिरि जी महाराज ने गुरु की महिमा और गुरु पर पूर्ण विश्वास का संदेश देते हुए एक प्रेरणादायक प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि एक अधेड़ उम्र के संत अपने शिष्य के साथ जा रहे थे। रास्ते में तेज बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ गया और वापस लौटने का कोई दूसरा रास्ता नहीं था। नदी पर बने छोटे से पुल के ऊपर से भी पानी बह रहा था। गुरुजी ने शिष्य से कहा कि वह उनका हाथ पकड़ ले, दोनों नदी को पार कर जाएंगे। लेकिन शिष्य संकोच करता रहा।

गुरुजी के बार-बार कहने पर भी जब शिष्य ने उनका हाथ नहीं पकड़ा तो गुरुजी ने स्वयं उसका हाथ मजबूती से पकड़ लिया और उसे खींचकर नदी के दूसरे किनारे तक ले गए। सुरक्षित दूसरे किनारे पहुंचने के बाद गुरुजी ने शिष्य से पूछा कि जब वह इतनी देर से उसका हाथ पकड़ने के लिए कह रहे थे तो उसने उनका हाथ क्यों नहीं पकड़ा।

इस पर शिष्य ने अत्यंत भावपूर्ण उत्तर देते हुए कहा, “गुरुवर! मैं बहुत कमजोर और दुर्बल हूं। मुझे स्वयं पर भरोसा नहीं था। यदि मैं आपका हाथ पकड़ता तो संभव है कि मेरा हाथ छूट जाता, लेकिन मुझे आप पर पूर्ण विश्वास है कि यदि आपने मेरा हाथ पकड़ लिया तो आप मुझे कभी नहीं छोड़ेंगे। इसलिए मैंने आपका हाथ पकड़ने के बजाय आपको ही मेरा हाथ पकड़ने दिया।”

स्वामी विवेकानन्द गिरि जी महाराज ने कहा कि यही गुरु-भक्ति और गुरु पर अटूट विश्वास का वास्तविक भाव है। हम सभी को अपने गुरुदेव से यही प्रार्थना करनी चाहिए कि वे हमारा हाथ पकड़ लें। जब गुरुदेव एक बार अपने शिष्य का हाथ पकड़ लेते हैं तो वे उसे बीच राह में नहीं छोड़ते, बल्कि उसके जीवन के अंतिम लक्ष्य और परम गंतव्य तक पहुंचाकर ही विश्राम करते हैं।

कार्यक्रम के अंत में गद्दीनशीन श्रीश्री 1008 स्वामी विवेकानन्द गिरि जी महाराज ने संत सम्मेलन में पधारे सभी महामंडलेश्वरों, महंतों, संतों एवं श्रद्धालु संगत का अभिनंदन एवं आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर संत समाज एवं श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

ये संत रहे प्रमुख रूप से उपस्थित

संत सम्मेलन की अध्यक्षता परम श्रद्धेय, परम आदरणीय, प्रातः स्मरणीय, परमार्दश आचार्य महामंडलेश्वर अनंत श्री विभूषित स्वामी विश्वात्मा पुरी जी महाराज तथा पीठाधीश्वर एवं उत्तराधिकारी पं० श्र० प० अ० प्रातः स्मरणीय, अर्चनीय, वंदनीय वर्तमान अनंत श्री विभूषित स्वामी दिव्य चैतन्य पुरी जी महाराज, साधना सदन आश्रम, कनखल, हरिद्वार के सान्निध्य में हुई।

इस अवसर पर निर्मल अखाड़ा के पीठाधीश्वर अनंत श्री विभूषित श्री महंत ज्ञान देव जी महाराज, श्रीश्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानन्द सरस्वती जी महाराज, श्री गीता विज्ञान पीठाधीश्वर, गुरुमंडल पीठाधीश्वर अनंत श्री विभूषित महामंडलेश्वर स्वामी भगवत स्वरूप जी महाराज, अनंत श्री विभूषित महामंडलेश्वर स्वामी जनकपुरी जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी शिवानन्द जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानन्द जी महाराज, अनंत श्री विभूषित स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी अनन्तानन्द जी महाराज, परम श्रद्धेय परम पूज्य आचार्य स्वामी चैतन्य पुरी जी महाराज, परम श्रद्धेय परम पूज्य आचार्य स्वामी धर्मानन्द जी महाराज, परम श्रद्धेय आचार्य डॉ. स्वामी हरिहर महाराज, परम श्रद्धेय स्वामी रविदेव शास्त्री जी महाराज, परम श्रद्धेय स्वामी अभिषेक चैतन्य गिरि जी महाराज, परम श्रद्धेय आचार्य स्वामी प्रज्ञान चैतन्य जी महाराज, साधना सदन, महंत स्वामी गोविन्द दास जी महाराज, परम श्रद्धेय परम पूज्य आचार्य शिवयोगी स्वामी रघुवंश पुरी जी महाराज, महंत स्वामी शिवानन्द जी महाराज, महंत स्वामी बाल सूरज दास जी महाराज, महंत स्वामी दिव्यांश वेदान्ती जी महाराज, महंत स्वामी दिनेश दास जी महाराज, परम श्रद्धेय परम पूज्य आचार्य स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज, राम निकेतन आश्रम, परम श्रद्धेय परम पूज्य आचार्य डॉ. महामंडलेश्वर स्वामी विजयानन्द जी महाराज, महंत स्वामी प्रेमानन्द जी, महामंडलेश्वर स्वामी विवेकानन्द जी महाराज, भगवत धाम, महंत स्वामी रवीन्दानंद जी महाराज, भगवत धाम तथा परम श्रद्धेय परम पूज्य आचार्य डॉ. स्वामी सुदर्शन दास जी महाराज सहित हरिद्वार के अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे।

संत सम्मेलन में संत समाज एवं श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही। पूरे आश्रम परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने ब्रह्मलीन श्रीश्री 1008 स्वामी तुरीयानन्द जी महाराज को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके बताए आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन संत समाज एवं श्रद्धालुओं के लिए आयोजित विशाल भंडारे के साथ हुआ।

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