गंगा तट से गूंजा सनातन एकता का संदेश: “जाति नहीं, सनातन हमारी पहचान”

गंगा तट से गूंजा सनातन एकता का संदेश: “जाति नहीं, सनातन हमारी पहचान”

हरिद्वार। तीर्थनगरी हरिद्वार में मां गंगा के पावन तट पर स्थित मां मनसा देवी चरण पादुका स्थल पर शनिवार को संत समाज ने सनातन एकता का ऐसा संदेश दिया, जिसने जाति-पाति और भेदभाव की सीमाओं को तोड़ते हुए “एक सनातन, एक समाज” का आह्वान किया।

गुजरात से अपने अनुयायियों के साथ पहुंचे महामंडलेश्वर स्वामी कुर्सी पुरी महाराज का अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज ने संतों और श्रद्धालुओं के साथ भव्य स्वागत किया।

इस अवसर पर श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज ने स्पष्ट कहा कि सनातन धर्म में किसी प्रकार का जातिगत भेदभाव नहीं है। सभी अखाड़ों में समानता का भाव है। उन्होंने कहा कि चाहे श्री रविदास अखाड़ा हो, निरंजनी अखाड़ा, जूना अखाड़ा या कबीर पंथ—सभी सनातन परंपरा के अंग हैं और सभी संत समाज के लिए समान हैं।

उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य समाज को बांटना नहीं, बल्कि जोड़ना और सनातन धर्म को मजबूत करना है।”

उन्होंने भावुक शब्दों में कहा, “जब मां गंगा किसी से उसकी जाति नहीं पूछतीं, तो हम कौन होते हैं भेदभाव करने वाले?”

कुंभ में वाल्मीकि अखाड़े के साथ स्नान की घोषणा
इस दौरान श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि आगामी हरिद्वार कुंभ के साथ-साथ नासिक और उज्जैन के कुंभ पर्व में भी वाल्मीकि अखाड़ा संत समाज के साथ मिलकर पवित्र स्नान करेगा।

इस घोषणा के साथ ही पूरे परिसर में उत्साह का माहौल बन गया और “वाल्मीकि भगवान की जय”, “गंगा मैया की जय” और “हर-हर महादेव” के जयघोष गूंज उठे।

संत की पहचान जाति नहीं, तप और त्याग से होती है
निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत राम रतन गिरि ने कहा कि संत जाति-पाति से परे होता है। अखाड़ों में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं रखा जाता।

उन्होंने कहा कि आज समय की आवश्यकता है कि सनातन समाज एकजुट होकर अपनी शक्ति को पहचाने और धर्म के उत्थान के लिए एक साथ आगे बढ़े।

उनका संदेश स्पष्ट था—“बांटने वाली सोच नहीं, जोड़ने वाली सोच चाहिए; भेदभाव नहीं, भाईचारा चाहिए।”

मां गंगा सबको समान रूप से अपनाती हैं
महामंडलेश्वर स्वामी कुर्सी पुरी महाराज ने कहा कि मां गंगा की धारा सभी के लिए समान है। गंगा किसी से उसकी जाति नहीं पूछतीं, बल्कि सभी को अपने आंचल में स्थान देकर पवित्र करती हैं।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गंगा सबको स्वीकार करती हैं, उसी प्रकार सनातन धर्म की परंपरा भी सर्वसमावेशी है और मानवता को जोड़ने का कार्य करती है।

श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद, गूंजे जयघोष
इस अवसर पर गुजरात के ग्रामीण क्षेत्रों से आए अनेक श्रद्धालु, जिनमें गांवों के सरपंच और प्रधान भी शामिल थे, संतों का आशीर्वाद लेने पहुंचे। सभी ने मां गंगा के तट पर सनातन एकता का संकल्प दोहराया।

पूरे वातावरण में भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया, जहां “गंगा मैया की जय”, “हर-हर महादेव” और “वाल्मीकि भगवान की जय” के जयघोष निरंतर गूंजते रहे।

रुद्राक्ष माला से हुआ सम्मान
कार्यक्रम के अंत में श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज ने गुजरात से आए श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें रुद्राक्ष की माला पहनाकर सम्मानित किया और आशीर्वाद देकर विदा किया।

एकता ही सनातन की असली शक्ति
हरिद्वार की पावन भूमि से संतों ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सनातन धर्म की शक्ति किसी जाति या भेद में नहीं, बल्कि उसकी एकता और समभाव में निहित है।

मां गंगा की अविरल धारा की तरह सनातन परंपरा भी सभी को साथ लेकर चलने वाली, समावेशी और मानवता को जोड़ने वाली ह

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