नकली-आसली विवाद ने पकड़ा तूल: अब ‘गणेश दास’ की पहचान पर भी उठा सवाल
हरिद्वार। श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन और निर्वाण अखाड़े के बीच चल रहा विवाद अब और गहराता जा रहा है। अखाड़े के मुखिया श्रीमहंत भक्त रामदास महाराज ने स्वयं को महत्वपूर्ण संत बताने वाले गणेश दास पर तीखा पलटवार किया है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि “असली गणेश दास” उनके साथ हैं, जबकि जो व्यक्ति खुद को गणेश दास बताकर प्रचार कर रहा है, उसका वास्तविक नाम कश्मीर सिंह है। उनके अनुसार वह व्यक्ति नकली पहचान के जरिए लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है।
श्रीमहंत भक्त रामदास महाराज ने कहा कि जो स्वयं नकली हैं, वही दूसरों को नकली बताने में लगे हैं। उन्होंने गणेश दास द्वारा “असली देवता” अपने पास होने के दावे को भी पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि देवता किसी अष्टमी या आयोजन से स्थापित नहीं होते, बल्कि वे श्रद्धा और आस्था का विषय होते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि अखाड़ा किसी एक प्रदेश का नहीं, बल्कि पूरे भारतवर्ष का है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति को भ्रम फैलाकर संत समाज को बांटने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
श्रीमहंत ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि ऐसे लोगों को कुंभ मेले में प्रवेश न दिया जाए, जो भगवा वस्त्र धारण कर संत समाज का माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि कुंभ का आयोजन दिव्य, भव्य और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो सके।
वहीं, श्री पंचायती अखाड़ा महा निर्वाणी के सचिव श्रीमहंत तथा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी महाराज ने भी हाल ही में निरंजनी अखाड़े के सचिव द्वारा किए गए व्यक्तिगत हमलों को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि वे किसी पर व्यक्तिगत आक्षेप नहीं लगाते और भगवान से सभी के लिए सद्बुद्धि की कामना करते हैं।
इस अवसर पर पंजाब के विभिन्न डेरों से आए संत, महंत, महामंडलेश्वर और विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। महंत रघुवीर दास महाराज (सुदर्शन आश्रम अखाड़ा) भी प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
गौरतलब है कि अब तक यह विवाद “असली और नकली देवता” तक सीमित था, लेकिन अब यह “असली और नकली गणेश दास” की पहचान तक पहुंच गया है, जिससे संत समाज में हलचल और बढ़ गई है।

