श्रीमद्भागवत कथा मानव कल्याण का अमृत: हरिद्वार में कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य शुभारंभ

श्रीमद्भागवत कथा मानव कल्याण का अमृत: हरिद्वार में कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य शुभारंभ

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार के भूपतवाला स्थित अग्रवाल भवन में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ का दिव्य शुभारंभ अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। प्रथम दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर कथा श्रवण किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

कथा व्यास परम पूज्य आचार्य श्री अमित शास्त्री जी (यमुनोत्री धाम, उत्तराखंड) ने अपने श्रीमुख से कथा का मंगलमय आरंभ करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जगत कल्याणकारी एवं मानव जीवन के लिए अमृत स्वरूप सुधा रस है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण का साक्षात स्वरूप है। जो श्रद्धा एवं भक्ति भाव से इसका श्रवण करता है, उसके जीवन से अज्ञान, मोह और दुःख का नाश होकर भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का उदय होता है।

प्रथम दिवस की कथा में आचार्य श्री ने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का विस्तृत वर्णन करते हुए नैमिषारण्य में शौनकादि ऋषियों द्वारा सूत जी से किए गए प्रश्नों का उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने कलियुग में भगवान के नाम, कथा और सत्संग की महत्ता को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में श्रीमद्भागवत कथा मानव जीवन को ईश्वर से जोड़ने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है। कथा श्रवण से श्रद्धालु भावविभोर होकर अपने जीवन को धन्य बना रहे हैं।

इस पावन अवसर पर प्रातःस्मरणीय गुरु भगवान परम पूज्य अद्वैत स्वरूप जी महाराज का दिव्य सानिध्य एवं आशीर्वाद भी सभी श्रद्धालुओं को प्राप्त हो रहा है। उनकी पावन उपस्थिति से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो गया।

श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के मुख्य यजमान के रूप में बरनाला से श्रद्धेय श्री पवन जी, श्री विनोद जी एवं श्री रमेश जी, चीका से श्री नरेश जी तथा पटियाला से पधारे श्रद्धालु परिवार श्रद्धा और समर्पण भाव से इस दिव्य आयोजन को संपन्न करा रहे हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।

यजमानों के विचार:

श्री पवन जी (बरनाला):
“श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हमारे जीवन का परम सौभाग्य है। प्रभु कृपा से संतों का सानिध्य और कथा श्रवण का अवसर प्राप्त हुआ है।”

श्री विनोद जी (बरनाला):
“हमारी कामना है कि इस कथा के माध्यम से समाज में धर्म, संस्कार और भक्ति का प्रकाश फैले तथा प्रत्येक परिवार भगवान से जुड़े।”

श्री रमेश जी (बरनाला):
“कथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि जीवन में उतारने का संदेश देती है। यह आयोजन सभी के जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति लेकर आए।”

श्री नरेश जी (चीका):
“हरिद्वार की पावन भूमि पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन करना हमारे लिए परम सौभाग्य है। भगवान एवं गुरु महाराज की कृपा से यह सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है।”

अंत में सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया कि अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का श्रवण करें और अपने जीवन को धर्ममय एवं कल्याणमय बनाएं।

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