सनातन धर्म की ज्योति बनीं साध्वी प्रेम बाईसा: हरिद्वार में 1008 दीपों से दी गई श्रद्धांजलि

सनातन धर्म की ज्योति बनीं साध्वी प्रेम बाईसा: हरिद्वार में 1008 दीपों से दी गई श्रद्धांजलि
हरिद्वार। जोधपुर की प्रसिद्ध कथा वाचिका एवं सनातन धर्म की प्रखर साध्वी प्रेम बाईसा के ब्रह्मलीन होने पर पूरे धर्मप्रेमी समाज में शोक की लहर है। उनकी पुण्य स्मृति में गंगा सभा, हर की पैड़ी पर एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर उनके पिता एवं गुरुजी श्री विरामनाथ जी द्वारा 1008 दीपों का दान कर मां गंगा के चरणों में अर्पित किया गया। दीपों की अलौकिक ज्योति के बीच साध्वी प्रेम बाईसा जी की आत्मा की शांति के लिए विशेष प्रार्थना की गई।
गुरु का संकल्प: अधूरे सपनों को करेंगे पूर्ण
श्रद्धांजलि सभा में गुरुजी ने भावुक होते हुए कहा कि साध्वी प्रेम बाईसा केवल एक साध्वी नहीं, बल्कि सनातन धर्म की अमूल्य धरोहर थीं। उन्होंने संकल्प लिया कि वे उनके हर अधूरे सपने को पूरा करने का पूर्ण प्रयास करेंगे और सनातन धर्म की पताका को सदैव ऊंचा रखते रहेंगे।
साध्वी प्रेम बाईसा: एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व
साध्वी प्रेम बाईसा ने अपने प्रवचनों, कथा वाचन और धर्म प्रचार के माध्यम से असंख्य लोगों के जीवन को दिशा दी। उनकी वाणी में श्रद्धा, भक्ति और संस्कारों की गूंज थी। वे समाज में धर्म, सेवा और संस्कृति के मूल्यों को जीवंत रखने वाली एक दिव्य आत्मा थीं।
श्रद्धांजलि के भावपूर्ण शब्द
“दीप की लौ बनकर तुमने जीवन को प्रकाश दिया,
भक्ति की राह दिखाकर हर मन को विश्वास दिया।
आज भले ही देह से दूर हो गई हो तुम,
पर हर हृदय में तुमने अपना निवास किया।”
साध्वी प्रेम बाईसा का जीवन सदैव सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए प्रेरणा स्रोत बना रहेगा। उनकी स्मृतियाँ, उनके विचार और उनके संकल्प आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन देते रहेंगे।

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