हरिद्वार। खड़खड़ी स्थित प्रसिद्ध श्री गंगा भक्ति आश्रम में पितृपक्ष के पावन अवसर पर प्रातः स्मरणीय, साक्षात परमात्मा स्वरूप गुरु भगवान स्वामी राघवानंद सरस्वती जी महाराज की पावन कृपा एवं गुरुजनों की पुण्य स्मृति में विशाल संत भंडारे का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ किया गया। ज्ञान एवं वैराग्य की तपोमूर्ति, साक्षात परमात्मा स्वरूप श्री महंत परम पूज्य कमलेशानंद सरस्वती जी महाराज के पतित-पावन सानिध्य में आयोजित संत भंडारे में बड़ी संख्या में संत-महापुरुषों ने सहभागिता कर आयोजन की गरिमा बढ़ाई।
आश्रम परिसर में प्रातःकाल से ही भक्तिमय वातावरण बना रहा। संत-महात्माओं के दर्शन, सत्संग एवं पावन विचारों का लाभ लेने के लिए श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। गुरुजनों की पुण्य स्मृति को नमन करते हुए श्रद्धालुओं ने संत-महापुरुषों से आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर परम पूज्य स्वामी हरी चेतनानंद जी महाराज ने कहा कि पितृपक्ष केवल अपने पूर्वजों के स्मरण और श्रद्धा अर्पित करने का समय नहीं, बल्कि सनातन संस्कारों, सेवा, सदाचार और आध्यात्मिक चेतना को जीवन में आत्मसात करने का भी पवित्र अवसर है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में संत सेवा और अन्नदान का विशेष महत्व है। संत-महापुरुषों का सानिध्य एवं आशीर्वाद मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करता है।
श्री महंत परम पूज्य कमलेशानंद सरस्वती जी महाराज ने अपने पावन उद्बोधन में गुरु महिमा, सेवा, भक्ति और वैराग्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु कृपा के बिना आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ना कठिन है। गुरु द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलकर ही मनुष्य अपने जीवन को सार्थक बना सकता है तथा समाज में सेवा, प्रेम और सद्भाव की भावना को मजबूत कर सकता है।
गुरु महाराज की महिमा पर विशेष शब्द
प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान स्वामी राघवानंद सरस्वती जी महाराज केवल एक संत स्वरूप ही नहीं, बल्कि साधना, सेवा, त्याग और गुरु कृपा की दिव्य परंपरा के प्रकाश पुंज हैं। उनके पावन स्मरण मात्र से मन में श्रद्धा, भक्ति और आत्मिक शांति का भाव जागृत होता है। गुरु महाराज ने अपने जीवन के माध्यम से सेवा, सदाचार, संत सम्मान और लोककल्याण की जिस आध्यात्मिक परंपरा को प्रतिष्ठित किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनी रहेगी। उनके चरणों में श्रद्धा अर्पित करना और उनके बताए सेवा एवं धर्म के मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
इस अवसर पर श्रीमद् जगतगुरु विष्णु स्वामी विजय रामदेवाचार्य भैया जी महाराज ने भी अपने पावन विचार व्यक्त करते हुए कहा कि लोककल्याण की भावना से किए गए सेवा कार्य सनातन धर्म की महान परंपराओं का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने गुरु-शिष्य संबंध तथा मानव जीवन में धर्म और अध्यात्म की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संत सेवा और सत्संग मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम हैं। पितृपक्ष में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए संत सेवा और अन्नदान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।
श्री महंत रघुवीर दास महाराज ने भी श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और सेवा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संत-महापुरुषों का पावन सानिध्य मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है और समाज को एकता, प्रेम एवं सद्भाव की प्रेरणा देता है।
संत भंडारे के दौरान संत-महापुरुषों का श्रद्धापूर्वक पूजन एवं सम्मान किया गया। श्रद्धालुओं ने संतों से आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके पश्चात संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धापूर्वक भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आश्रम परिसर में भक्ति, श्रद्धा और सेवा की त्रिवेणी दिखाई दी।
आयोजन में संत-महापुरुषों के पावन सानिध्य एवं आध्यात्मिक विचारों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने गुरुजनों की पुण्य स्मृति को नमन करते हुए संत-महात्माओं का आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर महंत नारायण दास पटवारी महाराज, महंत दुर्गादास महाराज, महंत ज्ञानानंद महाराज, महंत कृष्ण स्वरूप महाराज, स्वामी कृष्ण देव महाराज, स्वामी प्रेमानंद महाराज, स्वामी वीरेंद्र स्वरूप महाराज, पंजाबी बाबा जी, महंत स्वामी सत्यव्रतानंद महाराज, स्वामी अंकित शरण महाराज, महंत बिहारी शरण महाराज, कोतवाल कमल मुनि महाराज, कोतवाल रामदास महाराज सहित बड़ी संख्या में संत-महापुरुष एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
संत भंडारे के सफल आयोजन पर श्रद्धालुओं ने श्री गंगा भक्ति आश्रम के समस्त संत-महात्माओं एवं सेवाभावी जनों का आभार व्यक्त किया। साथ ही गुरुजनों की पावन स्मृति को नमन करते हुए उनके बताए आध्यात्मिक, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
श्री गंगा भक्ति आश्रम में पितृपक्ष पर भव्य संत भंडारा, संत-महापुरुषों ने दिया गुरु भक्ति, सेवा और सनातन संस्कारों का संदेश






