श्री मां रंगेश्वरी सहस्त्र चंडी महायज्ञ में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, संत-महापुरुषों के पावन वचनों से भक्त हुए अभिभूत
हरिद्वार। भूपतवाला स्थित श्री ललिता आश्रम में आयोजित श्री मां रंगेश्वरी सहस्त्र चंडी महायज्ञ में श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तजन महायज्ञ में श्रद्धापूर्वक सहभागिता कर मां भगवती की आराधना कर रहे हैं तथा यज्ञ में आहुति प्रदान कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।
महायज्ञ में सैकड़ों ब्राह्मणों द्वारा विधिवत मंत्रोच्चारण एवं वैदिक विधि-विधान के साथ यज्ञ अनुष्ठान संपन्न कराया जा रहा है। वैदिक मंत्रों की गूंज और यज्ञ की पावन आहुतियों से श्री ललिता आश्रम का संपूर्ण वातावरण भक्तिमय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत बना हुआ है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यज्ञ में आहुति देने के साथ ही संत-महापुरुषों के दर्शन एवं उनके पावन वचनों का श्रवण कर स्वयं को धन्य मान रहे हैं।
इस अवसर पर श्री सुनील अग्रवाल जी ने कहा कि मां भगवती की आराधना और यज्ञ जैसे धार्मिक अनुष्ठान मनुष्य के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शांति एवं आध्यात्मिक चेतना का संचार करते हैं। संत-महापुरुषों के सत्संग और उनके पावन विचारों का श्रवण व्यक्ति को जीवन में सही दिशा प्रदान करता है तथा उसके भीतर सेवा, सद्भाव और संस्कारों की भावना को मजबूत करता है।
श्री प्रदीप अग्रवाल जी ने कहा कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके माध्यम से समाज में संस्कार, सेवा, सद्भाव और सनातन संस्कृति के प्रति आस्था को भी सुदृढ़ किया जाता है। ऐसे आयोजन समाज को आध्यात्मिक रूप से जोड़ने और युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति एवं परंपराओं से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वहीं श्री सुनील सिंघल जी ने कहा कि मां रंगेश्वरी की कृपा और संत-महापुरुषों के आशीर्वाद से श्रद्धालुओं के जीवन में सुख-शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे यज्ञ, सत्संग और सेवा को अपने जीवन का हिस्सा बनाकर मानव जीवन को सार्थक बनाएं।
श्री मां रंगेश्वरी सहस्त्र चंडी महायज्ञ में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की बढ़ती सहभागिता आस्था का केंद्र बनी हुई है। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच यज्ञ में आहुति अर्पित कर भक्तजन मां भगवती का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही संत-महापुरुषों के पावन सानिध्य एवं आशीर्वचनों का लाभ लेकर श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति और आत्मिक संतोष का अनुभव कर रहे हैं।






