भूपतवाला के मां कात्यायनी मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा: गंगा दशहरा पर भक्ति और आध्यात्मिक चेतना की अनुपम धारा प्रवाहित

भूपतवाला के मां कात्यायनी मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा: गंगा दशहरा पर भक्ति और आध्यात्मिक चेतना की अनुपम धारा प्रवाहित
हरिद्वार। भूपतवाला स्थित विश्व प्रसिद्ध चमत्कारी मां कात्यायनी मंदिर एवं स्वामी भगवतानंद गिरि सत्संग आश्रम में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर आयोजित दिव्य श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना की अनुपम गंगा निरंतर प्रवाहित हो रही है। गंगा दशहरा के शुभ संयोग ने इस आयोजन को और भी पावन एवं विशेष बना दिया।
प्रातः स्मरणीय प्रख्यात कथा प्रवक्ता स्वामी प्रमोद जी महाराज के श्रीमुख से अमृतमयी श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कर श्रद्धालु अपने जीवन को धन्य एवं कृतार्थ बना रहे हैं। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं, भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति, ध्रुव जी की कठोर तपस्या तथा गजेन्द्र मोक्ष जैसे पावन प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिससे पूरा पंडाल भक्ति रस में सराबोर हो उठा।
कथा प्रवक्ता ने अपने उद्बोधन में कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवात्मा को परमात्मा से जोड़ने वाला दिव्य सेतु है। जिस घर में भगवत कथा का श्रवण होता है, वहां सदैव सुख, शांति और धर्ममय वातावरण का वास रहता है। उन्होंने सुदामा चरित्र का उदाहरण देते हुए बताया कि भगवान केवल निष्कपट प्रेम और सच्ची भक्ति से ही प्रसन्न होते हैं। निष्काम भाव से किया गया प्रभु स्मरण ही मानव जीवन को सफल बनाता है।
कथा के दौरान पूरा पंडाल “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों से गूंज उठा, जिससे वातावरण पूर्णतः भक्तिमय बन गया। इस पावन अवसर पर वैद्य हर्षवर्धन जैन, पार्षद आकाश भाटी, साध्वी योग प्रभा महाराज, श्री आदित्य सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा श्रवण कर आत्मिक शांति का अनुभव किया।
कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं ने संत महापुरुषों का आशीर्वाद प्राप्त कर समस्त मानव समाज के कल्याण एवं विश्व शांति की मंगलकामना की। हरिद्वार की पावन धरा पर मां गंगा की कृपा से आयोजित यह दिव्य कथा श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक जागृति का अद्भुत संगम बन गई।

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