श्री रामचरितमानस पाठ के पश्चात हुआ विशाल संत भंडारा,

श्री महर्षि ब्रह्म हरि उदासीन आश्रम में श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का भव्य समापन श्री रामचरितमानस पाठ के पश्चात हुआ विशाल संत भंडारा, संत समागम में महंतश्री की पुण्यतिथि पर संत-महापुरुषों ने अर्पित की श्रद्धांजलि

हरिद्वार। कनखल आनंदमयी पुरम, दक्ष रोड स्थित प्रसिद्ध श्री महर्षि ब्रह्म हरि उदासीन आश्रम में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया। आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का विधिवत समापन संत-महापुरुषों के पावन सानिध्य में हुआ। इसके पश्चात श्री रामचरितमानस के पाठ का आयोजन किया गया तथा विशाल संत भंडारे का आयोजन कर संत-समागम संपन्न हुआ।समापन अवसर पर आश्रम परिसर में बड़ी संख्या में संत-महापुरुषों एवं श्रद्धालु भक्तजनों ने सहभागिता की और भंडारे में प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। पूरे आश्रम परिसर में दिनभर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा।इस अवसर पर आश्रम के श्री महंत दामोदर शरण जी महाराज ने कहा कि संसार में गुरु की महिमा अपरंपार है। गुरु ही मनुष्य को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान, भक्ति और सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। गुरु की कृपा के बिना मनुष्य का जीवन अधूरा है। गुरु ही जीवन रूपी नैया को भवसागर से पार लगाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं।उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक ग्रंथ का श्रवण मात्र नहीं, बल्कि मनुष्य को धर्म, भक्ति, सदाचार और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाली अमूल्य साधना है। कथा के श्रवण एवं मनन से मनुष्य के अंतर्मन में आध्यात्मिक चेतना का संचार होता है और उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।संत समागम के दौरान महामंडलेश्वर परम पूज्य श्री हरि चेतनानंद महाराज, महंत रविदेव महाराज, महंत दिनेश दास महाराज एवं महंत सुतीक्ष्ण मुनि महाराज सहित अनेक संत-महापुरुष उपस्थित रहे। संत-महापुरुषों ने श्रद्धालुओं को गुरु भक्ति, धर्म, सत्य, सेवा और सदाचार का संदेश देते हुए कहा कि संतों का सानिध्य और गुरु चरणों में अटूट श्रद्धा मनुष्य के जीवन को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाती है।इस अवसर पर महाराजश्री की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में संत-महापुरुषों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आध्यात्मिक योगदान एवं सेवाओं को स्मरण किया। संतों ने कहा कि महापुरुष अपने शरीर से भले ही हमारे बीच उपस्थित न हों, लेकिन उनके विचार, संस्कार और आध्यात्मिक संदेश सदैव समाज का मार्गदर्शन करते रहते हैं।कार्यक्रम के अंत में संत-महापुरुषों का सम्मान कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया गया। इसके पश्चात आयोजित विशाल संत भंडारे में संतों एवं श्रद्धालु भक्तजनों ने प्रेमपूर्वक प्रसाद ग्रहण किया।हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी आश्रम में आयोजित विशाल भंडारे एवं संत समागम ने श्रद्धा और सेवा की अनूठी मिसाल प्रस्तुत की। धार्मिक अनुष्ठानों, श्री रामचरितमानस पाठ, संत-महापुरुषों के आशीर्वचन और भंडारे से संपूर्ण आश्रम परिसर भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने संतों का आशीर्वाद प्राप्त कर स्वयं को धन्य महसूस किया।

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