गर्भवती महिला की ऑपरेशन के दौरान मौत पर जन अधिकार पार्टी का प्रदर्शनात्मक विरोध

NPPL पर लापरवाही का आरोप, मजिस्ट्रेटी जांच और PPP एग्रीमेंट रद्द करने की मांग

हरिद्वार, 1 सितम्बर 2026।
हरिद्वार के चैनराय महिला अस्पताल परिसर स्थित 200 बेड के मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल में एक गर्भवती महिला की ऑपरेशन के दौरान हुई मौत को लेकर जन अधिकार पार्टी (जनशक्ति) ने कड़ा विरोध जताया है। पार्टी ने अस्पताल प्रबंधन एवं NPPL कंपनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

आज जन अधिकार पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव श्रीमती हेमा भंडारी के नेतृत्व में पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने अस्पताल पहुंचकर घटना की जानकारी ली। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन से घटना के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया गया।

श्रीमती हेमा भंडारी ने आरोप लगाया कि अस्पताल में सीएमएस का कार्यभार संभाल रहे डॉ. गुप्ता ने मामले को NPPL कंपनी से संबंधित बताते हुए डॉ. दीपा से बात करने के लिए कहा। वहीं, डॉ. दीपा द्वारा कथित रूप से इसे महज एक घटना बताकर मामले को टालने का प्रयास किया गया। पार्टी ने अस्पताल प्रबंधन के इस रवैये पर भी नाराजगी जताई।

हेमा भंडारी ने कहा कि 39 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह अस्पताल गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को निशुल्क एवं सुरक्षित प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया था। उनका आरोप है कि PPP मॉडल के तहत अस्पताल का संचालन निजी कंपनी को सौंपे जाने के बाद यहां आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक है। पार्टी के अनुसार अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों, पर्याप्त एनेस्थीसिया स्टाफ तथा इमरजेंसी ब्लड बैंक जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं का अभाव है।

उन्होंने कहा कि गर्भवती महिला की ऑपरेशन के दौरान हुई मौत की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए किसी स्तर पर लापरवाही जिम्मेदार थी या नहीं। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए।

जन अधिकार पार्टी की प्रमुख मांगें

जन अधिकार पार्टी ने प्रशासन के समक्ष निम्न मांगें रखी हैं—

  1. महिला की मौत की मजिस्ट्रेटी अथवा उच्च स्तरीय मेडिकल जांच कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक संबंधित ऑपरेशन थिएटर (OT) को तत्काल सील किया जाए।
  2. NPPL कंपनी के साथ किया गया PPP एग्रीमेंट रद्द कर अस्पताल का संचालन पुनः सरकार अपने हाथ में ले।
  3. पीड़ित परिवार को 20 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले डॉक्टरों एवं कंपनी प्रबंधन के विरुद्ध गैर इरादतन हत्या सहित उचित कानूनी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।
  4. जिलाधिकारी, हरिद्वार मामले की जांच कराकर सात दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करें।

पार्टी के हरिद्वार सोशल मीडिया प्रभारी अमन जैन एवं युवा नगर अध्यक्ष समर सक्सैना ने कहा कि यदि प्रशासन द्वारा सात दिनों के भीतर मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो जन अधिकार पार्टी (जनशक्ति) जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेगी।

पार्टी ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराई जाए और पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

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