संजीवन नाथ महाराज के नेतृत्व में गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़े का भव्य पट्टाभिषेक समारोह सम्पन्न, देश-विदेश में गूंजा सनातन धर्म का संदेश

संजीवन नाथ महाराज के नेतृत्व में गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़े का भव्य पट्टाभिषेक समारोह सम्पन्न, देश-विदेश में गूंजा सनातन धर्म का संदेश

हरिद्वार। वैश्विक स्तर पर बढ़ती भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, योग और सनातन जीवन दर्शन की स्वीकृति के बीच गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़ा सनातन धर्म की अलख जगाने का एक प्रभावशाली केंद्र बनकर उभर रहा है। अखाड़े के अध्यक्ष परम पूज्य संजीवन नाथ महाराज के दूरदर्शी नेतृत्व और प्रेरणादायी मार्गदर्शन में यह अखाड़ा धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार में निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

संजीवन नाथ महाराज एक ऐसे आध्यात्मिक व्यक्तित्व हैं, जिनमें ज्ञान, तप, सेवा और नेतृत्व का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। उनका जीवन “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” जैसे सार्वभौमिक सिद्धांतों का जीवंत उदाहरण है। उनके नेतृत्व में अखाड़ा न केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित है, बल्कि राष्ट्र सेवा, मानव कल्याण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य कर रहा है।

इसी कड़ी में अखाड़े द्वारा एक भव्य पट्टाभिषेक समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न संत-महापुरुषों को उनके तप, ज्ञान और वैराग्य के आधार पर महामंडलेश्वर पद से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर परम पूज्य श्री कंचन सोनी जी महाराज, पूनम जी महाराज (हरियाणा), श्री सुनील शर्मा जी महाराज (राजस्थान), श्री कृष्णकांत अत्रेय जी, श्री नीरज जी महाराज (उत्तर प्रदेश), रेखा कुमारी कौशल जी महाराज, सुमन देवी जी महाराज, बाबूराव त्रयंबक (महाराष्ट्र) तथा सचिन कुमार बाबासाहेब काल्पनी सहित अनेक संतों को सम्मानित किया गया।

यह गरिमामयी समारोह परम पूज्य श्री शंकर नाथ जी महाराज, महामंडलेश्वर श्री जगदीश प्रजापति जी महाराज, 1008 हर्षिता जी महाराज एवं 1008 साईं माँ नाथ महाराज जैसे महान तपस्वी संतों के पावन सानिध्य में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य सनातन धर्म की पताका को सुदृढ़ करते हुए समाज में आध्यात्मिक जागरण को बढ़ावा देना रहा।

गुरु श्री गोरखनाथ की तपस्या, योग साधना और लोककल्याण की महान परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अलख अखाड़ा समाज में धर्म, अध्यात्म, राष्ट्रभक्ति, सेवा, संस्कार और मानवीय मूल्यों का व्यापक प्रचार-प्रसार कर रहा है। अखाड़े के संत देशभर में धर्म सभाएं, संत सम्मेलन, श्रीमद्भागवत कथा, शिव महापुराण, यज्ञ, रुद्राभिषेक, भंडारे, सत्संग और योग शिविरों के माध्यम से समाज को आध्यात्मिक रूप से जागृत कर रहे हैं।

अखाड़ा केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में भी भारतीय संस्कृति, योग और ध्यान का संदेश पहुंचाकर विश्व समुदाय को शांति, सद्भाव और मानवता का मार्ग दिखा रहा है। इससे विदेशी नागरिक भी भारतीय आध्यात्मिक विरासत की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

संजीवन नाथ महाराज के मार्गदर्शन में अखाड़ा समाज सेवा के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। निर्धनों की सहायता, गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता और आपदा राहत जैसे कार्यों में अखाड़ा निरंतर सक्रिय है।

इस अवसर पर श्रीमती अंजलि अरोड़ा (ऋषिकेश), सोनिया सिंह (जौनपुर), कुंवर सिंह जी (बिशनपुर), सुनील शर्मा (कोतवाल), कमल मुनि महाराज सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

महंतों एवं महामंडलेश्वरों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत की आत्मा उसकी संस्कृति और सनातन परंपरा में निहित है। यदि नई पीढ़ी अपने धर्म, संस्कार और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ी रहेगी, तभी राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सकेगी।

गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़ा इसी संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है कि सनातन धर्म की अखंड ज्योति देश-विदेश में निरंतर प्रज्वलित रहे और भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक सशक्त रूप में पहुंचे।

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