ठोकर नंबर पांच पर संत सेवा, गोसेवा और अन्नदान के माध्यम से दिया मानवता एवं सनातन संस्कृति का संदेश
महामंडलेश्वर विश्वापुरी जी महाराज के सानिध्य में हुआ आयोजन, गुरु श्री राम बालक पुरी जी महाराज ने बताया पितृ स्मरण और सेवा का आध्यात्मिक महत्व
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार के सप्तऋषि क्षेत्र स्थित ठोकर नंबर पांच पर पितृ अमावस्या के पावन अवसर पर महाशक्तिपुंज सेवा ट्रस्ट की ओर से विशाल एवं भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव से संपन्न हुए इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। पितृ अमावस्या के विशेष महत्व को देखते हुए आयोजित इस भंडारे में अन्नदान और जनसेवा के माध्यम से सनातन संस्कृति की सेवा-परंपरा का संदेश दिया गया।
महाशक्तिपुंज सेवा ट्रस्ट की ओर से प्रत्येक अमावस्या पर नियमित रूप से भंडारे का आयोजन किया जाता है। इसी सेवा परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पितृ अमावस्या पर आयोजित यह भंडारा ट्रस्ट का 55वां भंडारा रहा। निरंतर धार्मिक एवं सामाजिक सेवा कार्यों में जुटा ट्रस्ट अन्नदान, संत सेवा और गोसेवा के माध्यम से समाज में परोपकार, करुणा और समर्पण की भावना को मजबूत करने का कार्य कर रहा है।
इस अवसर पर पंचदशनाम जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर एवं महाशक्तिपुंज सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री विश्वापुरी जी महाराज ने कहा कि पितृ अमावस्या पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और उनके स्मरण का विशेष पर्व है। भारतीय सनातन संस्कृति में पितरों के निमित्त दान-पुण्य, अन्नदान और जरूरतमंदों की सेवा को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का उद्देश्य केवल भंडारे का आयोजन करना नहीं, बल्कि समाज में सेवा, करुणा और धर्म के संस्कारों को मजबूत करना भी है।
महामंडलेश्वर श्री विश्वापुरी जी महाराज ने कहा कि इसी भावना के साथ ट्रस्ट की ओर से प्रत्येक अमावस्या पर भंडारे का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही संतों की सेवा और गोसेवा के कार्य भी नियमित रूप से किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि नर सेवा, संत सेवा और गोसेवा के माध्यम से मानव जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। सेवा और परोपकार ऐसे कार्य हैं, जो समाज में सद्भाव बढ़ाने के साथ-साथ सनातन संस्कृति की महान परंपराओं को भी जीवंत रखते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित महामंडलेश्वर श्री विश्वापुरी जी महाराज के गुरु श्री राम बालक पुरी जी महाराज ने पितृ अमावस्या के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में पितरों का स्मरण करना अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है। इस अवसर पर श्रद्धापूर्वक किए जाने वाले दान-पुण्य, अन्नदान और सेवा कार्यों का विशेष महत्व माना गया है।
श्री राम बालक पुरी जी महाराज ने कहा कि पूर्वजों के बताए संस्कारों, आदर्शों और जीवन मूल्यों को अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे धार्मिक अनुष्ठानों के साथ जरूरतमंदों की सहायता, संतों की सेवा और गोसेवा जैसे पुण्य कार्यों में भी बढ़-चढ़कर भाग लें। उन्होंने सेवा और परोपकार को भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण पहचान बताते हुए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार जनकल्याण के कार्यों में योगदान देने का संदेश दिया।
इस अवसर पर महाशक्तिपुंज सेवा ट्रस्ट के महामंत्री श्री राजवीर शर्मा ने कहा कि ट्रस्ट लंबे समय से धार्मिक आयोजनों और जनसेवा के कार्यों में निरंतर सक्रिय है। प्रत्येक अमावस्या पर भंडारे का आयोजन इसी सेवा परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। पितृ अमावस्या पर आयोजित विशेष भंडारा पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने के साथ-साथ समाज में सेवा, सद्भाव और मानवता का संदेश देने का माध्यम भी है।
उन्होंने कहा कि ट्रस्ट भविष्य में भी इसी प्रकार धार्मिक, सामाजिक और सेवाभावी गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाता रहेगा। ट्रस्ट का प्रयास है कि अन्नदान, संत सेवा और गोसेवा के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक सेवा का लाभ पहुंचे तथा समाज में परोपकार की भावना मजबूत हो।
आयोजन के दौरान गुरु-शिष्य परंपरा, संत सेवा, गोसेवा और अन्नदान के महत्व को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। श्रद्धा एवं सेवा भाव के साथ संपन्न हुए इस भंडारे ने सनातन संस्कृति की उस गौरवशाली परंपरा को सशक्त किया, जिसमें अन्नदान को पुण्य, सेवा को साधना और परोपकार को मानव जीवन का महत्वपूर्ण धर्म माना गया है।
महाशक्तिपुंज सेवा ट्रस्ट का यह 553वां भंडारा निरंतर सेवा, समर्पण और धार्मिक आस्था का प्रतीक बना। पितृ अमावस्या के पावन अवसर पर आयोजित इस सेवा कार्यक्रम ने संदेश दिया कि पूर्वजों का स्मरण केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं, बल्कि उनके संस्कारों को अपनाकर समाज और जरूरतमंदों की सेवा करना भी उनके प्रति सच्ची श्रद्धा का महत्वपूर्ण माध्यम है।






