अंतर्मन के दिव्य प्रकाश को पहचानें, तभी सार्थक होगा मानव जीवन : कृपाराम जी महाराज

अंतर्मन के दिव्य प्रकाश को पहचानें, तभी सार्थक होगा मानव जीवन : कृपाराम जी महाराज

भक्ति, ज्ञान और आत्मचिंतन से दूर होगा अज्ञान का अंधकार, प्रथम दिवस उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

हरिद्वार। भूपतवाला स्थित भट्टा कॉलोनी के गुरु कृपा भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। कथा व्यास प्रातः स्मरणीय परम पूज्य श्री कृपाराम जी महाराज ने श्रद्धालुओं को आत्मज्ञान, भक्ति और परमात्मा की अनुभूति का संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य को बाहरी चकाचौंध में नहीं, बल्कि अपने अंतर्मन में विद्यमान परमात्मा के दिव्य प्रकाश को पहचानने का प्रयास करना चाहिए। प्रथम दिवस बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

कथा व्यास श्री कृपाराम जी महाराज ने संत कबीर दास जी के प्रसिद्ध दोहे “तू कहता कागज की लेखी, मैं कहता आंखन की देखी” का भावार्थ समझाते हुए कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान केवल पुस्तकों में पढ़ लेने मात्र से प्राप्त नहीं होता, बल्कि उसे अपने जीवन में अनुभव करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मनुष्य बाहरी चमक-दमक और भौतिक प्रकाश को देखने में लगा रहता है, जबकि उसके भीतर स्वयं परमात्मा का दिव्य प्रकाश विद्यमान है।

उन्होंने कहा कि जब मनुष्य के भीतर का तेज जागृत होता है, तब बाहरी रोशनी, वैभव और चमक-दमक का आकर्षण स्वतः कम होने लगता है। बाहरी तेज समय और परिस्थितियों के साथ बदल सकता है, लेकिन आत्मा का प्रकाश शाश्वत है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर झांककर अंतर्मन में विराजमान परमात्मा को पहचानने का प्रयास करना चाहिए।

श्री कृपाराम जी महाराज ने कहा कि मानव जीवन परमात्मा की अनमोल देन है। इसे केवल सांसारिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति में व्यतीत करने के बजाय भक्ति, सेवा, सदाचार और आत्मचिंतन के मार्ग पर चलकर सार्थक बनाना चाहिए। जिस दिन मनुष्य अपने भीतर विद्यमान परमात्मा की अनुभूति कर लेता है, उसी दिन उसके जीवन में वास्तविक शांति और आनंद का उदय होता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने भीतर के अज्ञान रूपी अंधकार को भक्ति और ज्ञान के प्रकाश से दूर करें तथा अपने अंदर छिपे दिव्य तेज को जागृत कर परमात्मा की अनुभूति करें। यही मानव जीवन के कल्याण और उसकी वास्तविक सार्थकता का मार्ग है।

प्रथम दिवस कथा के दौरान कथा स्थल भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया तथा परम पूज्य संत के श्रीमुख से निकले ज्ञानवचनों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। इस अवसर पर परम पूज्य गुरुदेव राजाराम जी महाराज ने भी श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद प्रदान किया।

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