अवतरण दिवस पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, संतों ने दी दीर्घायु एवं आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामनाएं
हरिद्वार। प्राचीन अवधूत मंडल, ज्वालापुर रोड स्थित श्रीजी वाटिका में महामंडलेश्वर पूज्य श्री रूपेंद्र प्रकाश जी महाराज का अवतरण दिवस संत-महापुरुषों, श्रद्धालुओं एवं अनेक विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में बड़े ही धूमधाम, श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर देश-प्रदेश की अनेक प्रख्यात विभूतियों, संत समाज एवं प्रतिष्ठित अतिथियों ने कार्यक्रम में पहुंचकर महामंडलेश्वर श्री रूपेंद्र प्रकाश जी महाराज को अवतरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं मंगलकामनाएं प्रेषित कीं।
कार्यक्रम में संत-महापुरुषों ने कहा कि संतों का जीवन समाज के लिए प्रकाश स्तंभ के समान होता है। उनके तप, त्याग, सेवा, साधना और आध्यात्मिक चिंतन से समाज को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। संत समाज सदैव मानव कल्याण, धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण और सनातन परंपराओं को आगे बढ़ाने का कार्य करता रहा है।
संतों ने कहा कि महामंडलेश्वर श्री रूपेंद्र प्रकाश जी महाराज ने सनातन धर्म, संत परंपरा एवं मानव सेवा के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए समाज को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का कार्य किया है। उनका जीवन साधना, सेवा, संस्कार और धर्म के प्रति समर्पण का प्रेरणादायी संदेश देता है।
अवतरण दिवस पर विशेष पंक्तियां
“जहां गुरु चरण पड़ते हैं, वहां जीवन में प्रकाश उतरता है,
जहां संतों का आशीर्वाद मिलता है, वहां हर मार्ग सरल होता है।
गुरु महाराज का जीवन धर्म, सेवा और साधना की प्रेरणा है,
उनका आशीर्वाद ही भक्तों के जीवन की सबसे बड़ी साधना है।”
अवतरण दिवस के अवसर पर संत-महापुरुषों ने महामंडलेश्वर श्री रूपेंद्र प्रकाश जी महाराज के दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य एवं निरंतर आध्यात्मिक उन्नति की कामना की। संतों ने कहा कि महाराजश्री का स्नेह, आशीर्वाद और मार्गदर्शन समाज को निरंतर मिलता रहे तथा उनके सानिध्य से धर्म, सेवा और मानव कल्याण के कार्य निरंतर आगे बढ़ते रहें।
इस अवसर पर कार्यक्रम का वातावरण संतों के आशीर्वचन, मंगलकामनाओं और श्रद्धा-भक्ति से ओतप्रोत रहा। श्रद्धालुओं एवं अतिथियों ने महामंडलेश्वर श्री रूपेंद्र प्रकाश जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया और उनके अवतरण दिवस पर मंगलकामनाएं अर्पित करते हुए स्वयं को धन्य माना।
गुरु महाराज के अवतरण दिवस पर यही मंगलकामना है कि उनका आशीर्वाद सदैव समाज और भक्तजनों पर बना रहे तथा उनके जीवन से सेवा, साधना और सनातन संस्कृति की ज्योति निरंतर प्रज्वलित होती रहे।






