6 सितंबर को गोर्खाली समाज धूमधाम से मनाएगा हरितालिका तीज

6 सितंबर को गोर्खाली समाज धूमधाम से मनाएगा हरितालिका तीज

बैरागी कैंप में होगा भव्य आयोजन, तीज गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजेगा कार्यक्रम

हरिद्वार, 19 अगस्त। गोर्खाली महिला कल्याण समिति की ओर से आगामी 6 सितंबर, रविवार को बैरागी कैंप में हरितालिका तीज पर्व धूमधाम और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। कार्यक्रम को लेकर समिति ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। आयोजन में गोर्खाली समाज की महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर पूजा-अर्चना के साथ विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगी।

समिति की अध्यक्ष पदमा पांडेय और महामंत्री शारदा सुबेदी ने बताया कि हरितालिका तीज गोर्खाली समाज की महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ समाज की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का माध्यम भी है। इसके जरिए महिलाएं अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के साथ नई पीढ़ी को भी अपनी परंपराओं से जोड़ने का प्रयास करती हैं।

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में तीज गीत, नृत्य और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां मुख्य आकर्षण रहेंगी। महिलाओं द्वारा पारंपरिक परिधान में प्रस्तुत किए जाने वाले लोकगीत और नृत्य कार्यक्रम को विशेष रंग देंगे।

समिति की कोषाध्यक्ष रेखा शर्मा और तनुजा पांडेय ने कहा कि हरितालिका तीज केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि महिलाओं के आपसी मेल-मिलाप, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक सहभागिता का भी महत्वपूर्ण अवसर है। कार्यक्रम को भव्य और आकर्षक बनाने के लिए समिति की ओर से तैयारियां तेजी से की जा रही हैं। उन्होंने गोर्खाली समाज की महिलाओं से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में पहुंचकर आयोजन की शोभा बढ़ाने की अपील की।

वहीं, सपना खड़का और चंपा उपाध्याय ने कहा कि तीज पर्व के माध्यम से गोर्खाली समाज की समृद्ध संस्कृति, लोकगीतों और पारंपरिक रीति-रिवाजों को जीवंत रखने का प्रयास किया जाता है। इस बार कार्यक्रम में नई पीढ़ी की महिलाओं और युवतियों की भागीदारी पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि वे अपनी संस्कृति और परंपराओं को करीब से समझ सकें और उन्हें आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाएं।

समिति पदाधिकारियों ने बताया कि समाज के लोगों की सक्रिय सहभागिता के साथ हरितालिका तीज पर्व को उल्लास, उमंग और पारंपरिक रंग में मनाया जाएगा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गोर्खाली समाज के लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

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