🔥 अखाड़ा परिषद में बवाल: दो-दो अध्यक्ष पर घमासान, अब हत्या की साजिश का आरोप—संत समाज में हड़कंप!
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर संत समाज में इन दिनों जबरदस्त विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर मां मनसा देवी ट्रस्ट के महंत श्री डॉ. रवींद्र पुरी जी महाराज, जिन्हें विधिवत रूप से अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष चुना गया था, पद पर विराजमान हैं। वहीं दूसरी ओर महानिर्वाणी अखाड़ा के महंत रवींद्र पुरी को आठ अखाड़ों के समर्थन से अध्यक्ष घोषित कर दिया गया है।
इस दोहरी दावेदारी ने संत समाज में भ्रम, असमंजस और टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। इस पूरे मामले पर स्वामी प्रबोधानंद महाराज ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बड़ा बयान दिया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब श्री निरंजनी अखाड़ा के महंत और मां मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. रवींद्र पुरी पहले से ही अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष हैं, तो महानिर्वाणी अखाड़ा के महंत रवींद्र पुरी आपसी चुनाव करके खुद को अध्यक्ष कैसे घोषित कर सकते हैं।
प्रबोधानंद महाराज ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह संत समाज की गरिमा और सनातन धर्म की मर्यादा के खिलाफ है। उन्होंने कहा, “यदि संत ही सनातन धर्म के साथ इस तरह का खिलवाड़ करेंगे, तो आम जनता क्या संदेश लेगी?”
मामला यहीं नहीं रुका। स्वामी प्रबोधानंद महाराज ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष डॉ. रवींद्र पुरी जी महाराज के खिलाफ हत्या की साजिश रची जा रही है। उन्होंने इसे संत समाज में बड़े संकट का संकेत बताया।
उन्होंने मांग की कि जिसने भी इस तरह की पोस्ट डाली है या जो भी इस षड्यंत्र में शामिल है, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, पूरी जांच हो और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
इस पूरे विवाद ने अखाड़ा परिषद की एकता और विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब नजर इस बात पर है कि यह मामला किस दिशा में जाएगा और संत समाज इस संकट का समाधान कैसे निकालता है।

