वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जूना अखाड़े की पवित्र छड़ी यात्रा रवाना, चारों धाम सहित हिमालयी तीर्थों में गूंजेगा सनातन धर्म का संदेश

स्वामी अवधेशानंद गिरि और श्रीमहंत हरि गिरि महाराज के सानिध्य में हुआ शुभारंभ, लगभग 70 साधु-संतों और नागा संन्यासियों का जत्था हुआ रवाना

हरिद्वार, 14 अक्टूबर। धर्मनगरी हरिद्वार में बुधवार को पौराणिक सिद्धपीठ मायादेवी मंदिर से जूना अखाड़े की पवित्र छड़ी यात्रा का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत शुभारंभ हुआ। जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री एवं जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरि महाराज के सानिध्य में संतों ने छड़ी यात्रा को उत्तराखंड के पौराणिक तीर्थों के लिए रवाना किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, कुंभ मेला अधिकारी सोनिका और अपर मेला अधिकारी दयानंद सरस्वती भी मौजूद रहे।हिमालय पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी वीरेंद्रानंद गिरि महाराज के नेतृत्व में लगभग 70 साधु-संतों, नागा संन्यासियों और श्रद्धालुओं का जत्था इस पावन यात्रा पर निकला। यात्रा के दौरान पवित्र छड़ी उत्तराखंड के चारों धाम यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ सहित केदारखंड एवं मानसखंड के विभिन्न पौराणिक तीर्थों, सिद्धपीठों, शिवालयों और शक्तिपीठों के दर्शन करेगी। इसके साथ ही ओम पर्वत और आदि कैलाश की यात्रा भी प्रस्तावित है।छड़ी यात्रा का उद्देश्य सनातन धर्म की प्राचीन परंपराओं को जीवंत बनाए रखना, आध्यात्मिक चेतना का जागरण करना और राष्ट्रीय एकता का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है। यात्रा के माध्यम से श्रद्धालुओं को देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत, प्राचीन धार्मिक मान्यताओं और तीर्थ परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।इस अवसर पर जूना अखाड़े के वरिष्ठ सभापति श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रीमहंत महेश पुरी, श्रीमहंत केदारपुरी महाराज, महामंत्री श्रीमहंत शैलेंद्र गिरि, श्रीमहंत रामेश्वर गिरि सहित अनेक संत-महंत उपस्थित रहे।जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सचिव श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि पावन छड़ी यात्रा सनातन धर्म की प्राचीन और गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है। यह गुरु-शिष्य परंपरा, त्याग, तपस्या और भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक विरासत को जीवंत रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है।उन्होंने कहा कि इस यात्रा के जरिए युवा पीढ़ी को वेदों, उपनिषदों और श्रीमद्भगवद्गीता के संदेशों से जोड़ने का अवसर मिलेगा। छड़ी यात्रा न केवल धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय एकता की भावना को भी मजबूत करेगी।

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