राष्ट्रीय अंगदान दिवस पर एम्स ऋषिकेश की पहल: जागरूकता वॉकाथॉन, सम्मान समारोह एवं हरित रोशनी से जगमगाया जानकी सेतु

राष्ट्रीय अंगदान दिवस पर एम्स ऋषिकेश की पहल: जागरूकता वॉकाथॉन, सम्मान समारोह एवं हरित रोशनी से जगमगाया जानकी सेतु

ऋषिकेश, — 16वें राष्ट्रीय अंगदान दिवस के अवसर पर एम्स ऋषिकेश के अंग प्रत्यारोपण विभाग द्वारा मोहन फाउंडेशन के सहयोग से अंगदान के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने हेतु विविध कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य समाज में अंगदान एवं देहदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना तथा अंगदाता परिवारों के अमूल्य योगदान का सम्मान करना रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः गंगा तट स्थित आस्था पथ पर आयोजित अंगदान जागरूकता वॉकाथॉन एवं फ्लैग मार्च से हुई, जिसका शुभारंभ एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह द्वारा किया गया। इस वॉकाथॉन में चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों एवं स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और “अंगदान – महादान” का संदेश जन-जन तक पहुंचाया। वॉकाथॉन ने स्थानीय नागरिकों, श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करते हुए अंगदान के महत्व को प्रभावी ढंग से उजागर किया।

इस अवसर पर एम्स ऋषिकेश, मोहन फाउंडेशन एवं लोक निर्माण विभाग (PWD) के संयुक्त प्रयास से जानकी सेतु को हरे रंग की रोशनी से प्रकाशित किया गया। हरा रंग वैश्विक स्तर पर अंग एवं ऊतक दान का प्रतीक माना जाता है। उत्तराखंड में यह पहली बार हुआ कि अंगदाता परिवारों के सम्मान में किसी प्रमुख सार्वजनिक स्थल को इस प्रकार हरित रोशनी से सजाया गया, जो राज्य के अंगदान अभियान के लिए एक ऐतिहासिक पहल है।

इसके पश्चात आयोजित सम्मान समारोह में वर्ष 2025–26 के जीवित गुर्दा दाताओं, मृतक अंगदाता परिवारों तथा देहदान करने वाले परिवारों को सम्मानित किया गया। इस दौरान उनके साहस, संवेदनशीलता एवं मानवता के प्रति समर्पण को नमन करते हुए उन्हें समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह ने कहा कि अंगदान मानवता की सर्वोच्च सेवा है और प्रत्येक नागरिक को अपने परिवार के साथ इस विषय पर चर्चा कर अंगदान का संकल्प लेना चाहिए।

अंग प्रत्यारोपण विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. रोहित गुप्ता ने बताया कि एम्स ऋषिकेश उत्तराखंड में मृतक अंगदान कार्यक्रम को मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। जन-जागरूकता अभियानों, स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण एवं समाज की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से अंगदान की संस्कृति को विकसित किया जा रहा है।

डॉ. अंकुर मित्तल ने कहा कि अंगदान केवल चिकित्सा का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनाओं का सर्वोच्च उदाहरण है, जिससे प्रत्येक व्यक्ति को जुड़ना चाहिए।

कार्यक्रम में डीन शैक्षणिक प्रोफेसर डॉ. सौरभ वार्ष्णेय, मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. सत्यश्री बालिजा, प्रो. संजीव मित्तल, उपनिदेशक प्रशासन लेफ्टिनेंट कर्नल गोपाल मेहरा सहित अनेक वरिष्ठ चिकित्सक, अधिकारी एवं मोहन फाउंडेशन की टीम उपस्थित रही।

कार्यक्रम के अंत में सभी नागरिकों से अंगदान का संकल्प लेने तथा अंगदाता परिवारों के इस महान योगदान का सम्मान करने का आह्वान किया गया।

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