हजारों श्रद्धालु पांच किलोमीटर तक कर रहे दंडवत यात्रा, कनखल से ,तुलसी चौक फिर हरकी पैड़ी तक भक्तिभाव और आस्था का अद्भुत नजारा
रात्रि एक बजे भी जारी रही दंडवत यात्रा, दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु लेटकर गंगा तट तक पहुंच रहे
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में परम पूज्य गुरुदेव श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर पूर्ण गुरु करौली शंकर महादेव जी महाराज की भव्य एवं दिव्य दंडवत यात्रा लगातार जारी है। इस यात्रा में देश के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ शामिल हो रहे हैं। गंगा सेवा के उद्देश्य से निकाली जा रही इस अनूठी यात्रा में श्रद्धालु लगभग पांच किलोमीटर तक दंडवत प्रणाम करते हुए हरकी पैड़ी की ओर बढ़ रहे हैं।
यात्रा के दौरान आस्था और समर्पण का अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है। श्रद्धालु जमीन पर लेटकर दंडवत करते हुए अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं। विशेष बात यह है कि रात के एक बजे भी भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। कनखल क्षेत्र के तुलसी चौक से शिवमूर्ति चौक, पोस्ट ऑफिस होते हुए हरकी पैड़ी की ओर लगातार श्रद्धालुओं का जत्था दंडवत यात्रा करता हुआ आगे बढ़ता रहा। इस दौरान पूरा मार्ग करौली शंकर महाराज के जयकारों से गूंजता रहा।
श्रद्धालु जयकारे लगाते हुए पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ गंगा तट की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। मौसम और रात्रि के समय की परवाह किए बिना भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है। दूर-दराज से आए श्रद्धालु इस दिव्य यात्रा में शामिल होकर स्वयं को सौभाग्यशाली मान रहे हैं।
धर्मनगरी में मिश्री मठ की ओर से आयोजित इस दंडवत यात्रा में आयोजकों के अनुमान के अनुसार हजारों श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। वहीं, अनेक श्रद्धालु नया उदासीन अखाड़े में अपनी बारी आने का इंतजार भी कर रहे हैं। यात्रा में शामिल होने के लिए भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।
इस अवसर पर मिश्री मठ के परमाध्यक्ष करौली शंकर महादेव महाराज ने दंडवत यात्रा के उद्देश्य एवं इसकी आध्यात्मिक महत्ता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। गंगा सेवा के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही यह यात्रा धर्मनगरी हरिद्वार में श्रद्धा, भक्ति और समर्पण का विशेष संदेश दे रही है।
दंडवत यात्रा के दौरान उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ और आधी रात तक गूंजते जयकारे हरिद्वार में भक्ति के अनूठे वातावरण को दर्शा रहे हैं।
रिपोर्ट: पूजा शर्मा, हरिद्वार उत्तराखंड






