झालावाड़ आश्रम हरिपुर कला में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन, श्रद्धालुओं ने भीखु भाई के निस्वार्थ सेवा कार्यों को सराहा

श्रवण सेवा केंद्र गुजरात ने असहाय बुजुर्गों को कराया हरिद्वार में भागवत कथा श्रवण, मां गंगा के दर्शन और गंगा आरती के बाद भावुक मन से अपने घरों को लौटे श्रद्धालु

हरिद्वार, उत्तराखंड। हरिद्वार के हरिपुर कला स्थित झालावाड़ आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का भव्य रूप से समापन हुआ। इस अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक आस्था से सराबोर श्रद्धालुओं ने श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया। कथा के समापन के पश्चात श्रद्धालुओं ने मां गंगा के पावन तट पर पहुंचकर गंगा स्नान किया, मां गंगा की आरती में भाग लिया तथा विभिन्न मंदिरों में दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की। इसके बाद सभी श्रद्धालु अपने-अपने निवास स्थानों की ओर प्रस्थान कर गए।

इस धार्मिक आयोजन की विशेष बात यह रही कि श्रवण सेवा केंद्र गुजरात के माध्यम से ऐसे असहाय और बुजुर्ग श्रद्धालुओं को हरिद्वार की पावन धरा पर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने का अवसर मिला, जिनका सहारा बनने वाला कोई नहीं था। सेवा केंद्र के इस प्रयास से बुजुर्गों को मां गंगा के दर्शन करने, कथा श्रवण करने और धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने अपने भाव व्यक्त करते हुए भीखु भाई के प्रति हृदय से आभार जताया। उन्होंने कहा कि भीखु भाई ने श्रवण सेवा केंद्र गुजरात के माध्यम से असहाय बुजुर्गों को हरिद्वार लाकर उन्हें आध्यात्मिक शांति, धार्मिक आस्था और मां गंगा के सानिध्य में समय बिताने का अनमोल अवसर प्रदान किया है। श्रद्धालुओं ने कहा कि इस प्रकार की निस्वार्थ सेवा समाज में मानवता, करुणा और परोपकार की भावना को मजबूत करती है।

सभी श्रद्धालुओं ने भीखु भाई के सेवा कार्यों की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए उनके स्वस्थ जीवन, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। उन्होंने प्रार्थना की कि भीखु भाई इसी प्रकार जीवनभर असहाय, जरूरतमंद और बुजुर्ग लोगों की सेवा करते रहें तथा उन्हें धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजनों से जोड़कर उनके जीवन में खुशियां लाते रहें।

झालावाड़ आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा का यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और मानवता का प्रेरणादायी उदाहरण भी बना। मां गंगा के पावन तट पर कथा श्रवण और दर्शन का पुण्य लाभ लेकर श्रद्धालु भावुक मन से अपने घरों को लौटे और भीखु भाई एवं श्रवण सेवा केंद्र गुजरात के प्रति आभार व्यक्त किया।

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