हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार की पावन धरा पर मां गंगा के तट के समीप भूपतवाला स्थित आश्रम में कोटा, राजस्थान से आए श्रद्धालुओं की ओर से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन हवन-पूजन, पूर्णाहुति एवं भंडारे के साथ श्रद्धा और भक्तिभाव से संपन्न हुआ। पितृपक्ष के पावन अवसर पर आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया तथा अपने पितरों की आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना की।
कथा के अंतिम दिवस पर आश्रम परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। कथा व्यास गोविन्द कृष्ण शास्त्री जी ने अपने मुखारविंद से श्रीमद्भागवत की महिमा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति, सदाचार और प्रभु भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। कथा के दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं एवं श्रीमद्भागवत के दिव्य प्रसंगों का श्रवण करते रहे।
इस धार्मिक आयोजन की आयोजक निशा माताजी एवं सुमित गुप्ता सहित कोटा, राजस्थान से आए समस्त श्रद्धालुओं ने पूरे सप्ताह श्रद्धा और भक्ति के साथ कथा में सहभागिता की। कथा के विश्राम दिवस पर विधि-विधान से हवन-पूजन किया गया तथा पूर्णाहुति के साथ कथा को विराम दिया गया। इसके पश्चात भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
पितृपक्ष में हरिद्वार की पावन नगरी में आयोजित इस श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं ने मां गंगा के दर्शन एवं पूजन के साथ आध्यात्मिक शांति और पुण्य की कामना की। श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना की और अपने परिवार तथा पितरों के कल्याण की प्रार्थना की।
इस प्रकार सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन धार्मिक आस्था, भक्ति, हवन-पूजन और सेवा भाव के साथ हुआ। आयोजन के अंतिम दिन आश्रम में श्रद्धा और आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा।






