शारदा पैलेस में 150 साधक-साधिकाओं ने ध्यान-साधना एवं सत्संग में लिया भाग, संत-महात्माओं ने दिया आत्मकल्याण का संदेश
हरिद्वार। शारदा पैलेस, हरिद्वार में महर्षि मेँहीँ अन्नक्षेत्र हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित मास-ध्यान साधना शिविर 2026 का उनतीसवाँ दिवस श्रद्धा, भक्ति, अनुशासन और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। शिविर के दौरान ध्यान-साधना एवं सत्संग से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। इस अवसर पर लगभग 150 साधक-साधिकाओं ने श्रद्धापूर्वक ध्यान-साधना और सत्संग में सहभागिता की।
शिविर में आयोजित सत्संग कार्यक्रम में गुरुचरण सेवी स्वामी प्रमोद जी महाराज, स्वामी गुरुनंदन जी महाराज, स्वामी बिंदेश्वरी जी महाराज, स्वामी नंदन जी महाराज, स्वामी संजीवानंद जी महाराज, स्वामी नरेंद्र बाबा जी महाराज तथा स्वामी अभिषेकानंद जी महाराज सहित अनेक संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। संत-महात्माओं के सानिध्य में साधकों को आध्यात्मिक ज्ञान, ध्यान-साधना और आत्मचिंतन का लाभ प्राप्त हुआ।
सत्संग के दौरान संत-महात्माओं ने ध्यान-साधना, नाम-स्मरण, सत्संग और निष्काम सेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है। मनुष्य को अपने जीवन का सदुपयोग करते हुए आत्मकल्याण और ईश्वर-प्राप्ति के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए। सांसारिक कार्यों के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी समय निकालना आवश्यक है।
संतों ने कहा कि नियमित ध्यान-साधना से मन की चंचलता को शांत करने में सहायता मिलती है। साधना और सत्संग के माध्यम से व्यक्ति के जीवन में प्रेम, विनम्रता, सदाचार, संयम तथा सेवा-भाव जैसे गुणों का विकास होता है। सत्संग मनुष्य को सही मार्ग दिखाने के साथ-साथ जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने की प्रेरणा भी देता है।
शिविर में विभिन्न स्थानों से पहुंचे साधक-साधिकाओं ने पूरे अनुशासन और श्रद्धा के साथ ध्यान-साधना एवं सत्संग में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान शारदा पैलेस का वातावरण भक्ति, शांति और आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण रहा। साधकों ने संत-महात्माओं के विचारों को आत्मसात करते हुए नियमित साधना और आध्यात्मिक जीवन अपनाने का संकल्प लिया।
महर्षि मेँहीँ अन्नक्षेत्र हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित इस मास-ध्यान साधना शिविर के माध्यम से साधकों को निरंतर ध्यान, सत्संग और आध्यात्मिक साधना का अवसर मिल रहा है। शिविर का उद्देश्य साधकों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करना तथा उनके जीवन में आत्मचिंतन, सदाचार और सेवा की भावना को प्रोत्साहित करना है।
स्वामी पंकज बाबा ने बताया कि शिविर में प्रतिदिन साधक-साधिकाएं श्रद्धा एवं अनुशासन के साथ सहभागिता कर रहे हैं। उनतीसवें दिवस पर लगभग 150 साधक-साधिकाओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक उत्साह से भर दिया। उन्होंने कहा कि ध्यान-साधना और सत्संग के माध्यम से व्यक्ति अपने मन को एकाग्र कर आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ सकता है।






