साध्वी समाहिता दीदी जी ने भक्ति, सेवा और पितृ स्मरण का बताया महत्व
हरिद्वार। पितृ पक्ष के पावन अवसर पर अग्रवाल भवन, भूपतवाला में मां बनभौरी देवी एवं महाराजा अग्रसेन परिवार की ओर से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास परम पूज्या साध्वी समाहिता दीदी जी ने श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, धर्म, संस्कार और आध्यात्मिक जीवन के महत्व से परिचित कराया।
साध्वी समाहिता दीदी जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करने वाली दिव्य ज्ञानधारा है। भगवान की कथा का श्रवण मन को निर्मल करता है तथा मनुष्य को अहंकार, मोह और सांसारिक चिंताओं से ऊपर उठाकर ईश्वर के प्रति समर्पण का मार्ग दिखाता है।
उन्होंने पितृ पक्ष में श्रीमद्भागवत कथा श्रवण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह समय अपने पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। पितरों के निमित्त सेवा, दान, सत्कर्म और भगवान के नाम का स्मरण करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शांति का संचार होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म एवं संस्कारों को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया
साध्वी समाहिता दीदी जी की वाणी में भक्ति की मधुरता और आध्यात्मिक ज्ञान की गहराई का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। उनके मुखारविंद से निकला श्रीहरि का प्रत्येक नाम श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति का भाव जागृत करता है। उनकी कथा शैली सरल, सहज और हृदयस्पर्शी है, जो श्रोताओं को श्रीमद्भागवत के आध्यात्मिक संदेश से जोड़ने के साथ-साथ जीवन में धर्म, सेवा और संस्कार अपनाने की प्रेरणा देती है।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा पंडाल में उपस्थित रहे और पूरी श्रद्धा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया। भक्ति गीतों एवं भगवान के जयघोष से पूरा कथा स्थल भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने कथा के दिव्य प्रसंगों का रसपान करते हुए स्वयं को प्रभु भक्ति में सराबोर किया






