हरिद्वार। भाटिया भवन रोड, श्रवणनाथ नगर स्थित श्री गोपीनाथ जी मंदिर का वार्षिक अधिवेशन भगवान श्री गोपीनाथ जी महाराज की पतित पावन कृपा तथा गोस्वामी किशोरी लाल जी महाराज, गोस्वामी प्रीतम लाल जी महाराज सहित समस्त गुरुजनों के आशीर्वाद से संत-महापुरुषों के पावन सानिध्य में श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।
वार्षिक अधिवेशन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने पहुंचकर भगवान श्री गोपीनाथ जी महाराज के दर्शन एवं पूजन किए तथा परिवार, समाज और समस्त मानवता के सुख, शांति एवं मंगल की कामना की। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा। भगवान के जयकारों से मंदिर परिसर गुंजायमान रहा।
इस अवसर पर संत-महापुरुषों एवं गुरुजनों ने अपने आशीर्वचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान की भक्ति, गुरु सेवा, धर्म, सदाचार एवं मानव सेवा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। संतों ने कहा कि प्रभु की भक्ति मनुष्य के जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करती है, जबकि गुरुजनों का मार्गदर्शन आध्यात्मिक जीवन को सही दिशा देता है। ऐसे धार्मिक आयोजन सनातन परंपराओं और आध्यात्मिक संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
श्री श्यामलाल जी ने कहा कि भगवान श्री गोपीनाथ जी की भक्ति मनुष्य के जीवन में प्रेम, शांति और करुणा का संचार करती है। सच्चे मन से प्रभु का स्मरण करने वाला भक्त सदैव भगवान की कृपा का पात्र बनता है। उन्होंने कहा कि संतों का सानिध्य और गुरुजनों का आशीर्वाद जीवन में विशेष महत्व रखता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, सेवा और भक्ति को जीवन का आधार बनाने तथा जरूरतमंदों की सहायता के लिए सदैव आगे रहने का आह्वान किया।
श्री जय लाल वाली जी ने कहा कि भगवान के चरणों में श्रद्धा और विश्वास रखने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। प्रभु भक्ति के साथ मानव सेवा करना ही सच्चे अर्थों में धर्म का पालन है।
श्री कुंज बिहारी गोस्वामी जी ने कहा कि गुरु की कृपा के बिना आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ना कठिन है। गुरु मनुष्य को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान और भक्ति के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से गुरुजनों के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
श्री तपन गोस्वामी जी ने कहा कि भगवान श्री गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। मनुष्य को अहंकार का त्याग कर प्रेम, विनम्रता और सेवा भाव को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।
श्री सुधाकर गोस्वामी जी ने कहा कि सनातन संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता उसकी भक्ति, सेवा और संत परंपरा है। इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और आध्यात्मिक चेतना को मजबूती मिलती है।
श्री मोहन गोस्वामी जी ने कहा कि भगवान का नाम ही मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा आधार है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से प्रभु का स्मरण करने तथा धर्म एवं सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
इस अवसर पर केशव गोस्वामी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने संत-महापुरुषों एवं गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने संतों के प्रवचन एवं आशीर्वचनों को श्रद्धापूर्वक सुना तथा भगवान श्री गोपीनाथ जी महाराज के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।
वार्षिक अधिवेशन के समापन अवसर पर संत-महापुरुषों एवं गुरुजनों का सम्मान किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्री गोपीनाथ जी महाराज से समस्त समाज के कल्याण, सुख-शांति एवं समृद्धि की प्रार्थना की। आयोजन की सफलता पर भक्तजनों ने मंदिर से जुड़े संतों, गुरुजनों एवं सेवकों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर महंत रवि देव महाराज, महंत दुर्गादास महाराज, महंत सूरज दास महाराज, महामंडलेश्वर गंगा दास उदासीन महाराज, महंत गंगा दास जी महाराज, श्रीमहंत विष्णु दास महाराज, महंत कमलेशानंद सरस्वती महाराज, महंत शुक्र गिरी महाराज, कोतवाल कमल मुनि महाराज, कोतवाल रामदास महाराज सहित बड़ी संख्या में संत-महापुरुष एवं श्रद्धालु भक्तजन उपस्थित रहे।






