हरिद्वार। ज्वालापुर स्थित गुरु रविदास चौक के निकट स्थानीय नागरिकों के अथक प्रयासों और गुरु जी की कृपा से प्रत्येक रविवार ‘गुरु जी की रसोई’ का आयोजन किया जा रहा है। यह सेवा कार्य लगातार 14 सप्ताह पूरे कर चुका है और बिना किसी व्यवधान के निरंतर जारी है। रसोई के माध्यम से समाज के विभिन्न धर्मों एवं वर्गों के गरीब और जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क भोजन प्रसाद वितरित किया जाता है।
प्रत्येक रविवार हजारों जरूरतमंद लोग गुरु जी की रसोई में भोजन प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस पुनीत पहल का उद्देश्य केवल जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाना ही नहीं, बल्कि समाज में सेवा, समर्पण, आपसी प्रेम और भाईचारे की भावना को मजबूत करना भी है। रसोई के संचालन में स्थानीय लोग अपनी-अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग कर रहे हैं।
श्री मुकेश वर्मा ने कहा कि भूखे व्यक्ति को भोजन कराना केवल सेवा नहीं, बल्कि मानवता के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। किसी जरूरतमंद के चेहरे पर भोजन मिलने के बाद आने वाली मुस्कान ही इस सेवा कार्य की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
कमल उलियान ने कहा कि गुरु जी की रसोई किसी एक धर्म या वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण मानव समाज की सेवा का माध्यम है। उनका प्रयास है कि रविवार के दिन कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति भूखा न रहे और अधिक से अधिक लोग आपसी प्रेम एवं भाईचारे के साथ इस सेवा कार्य से जुड़ें।
वहीं अनिल चौहान ने कहा कि अन्नदान से बड़ा कोई पुण्य कार्य नहीं है। जरूरतमंदों की सेवा करने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि सेवा की यह भावना निरंतर आगे बढ़े और अधिक से अधिक लोग इस पुनीत कार्य से जुड़ें, यही सभी की कामना है।
गुरु जी की रसोई के संचालन एवं भोजन वितरण में अमन कुमार, दीपक कुमार, विशाल राठौर, राकेश कंसल, लोकेश सहित अनेक स्थानीय नागरिक निरंतर सहयोग एवं सेवा-समर्पण भाव से अपना योगदान दे रहे हैं।
14 सप्ताह से लगातार चल रही यह रसोई समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और मानवता की सुंदर मिसाल बन रही है। यहां बिना किसी जाति, धर्म या वर्ग के भेदभाव के जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
सेवा से जुड़े लोगों का कहना है कि “नर सेवा ही नारायण सेवा है।” इसी भावना के साथ स्थानीय नागरिक प्रत्येक रविवार इस पुनीत सेवा कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं। उनका संकल्प है कि गुरु जी की कृपा से आने वाले समय में रसोई और व्यापक रूप ले तथा अधिक से अधिक जरूरतमंदों तक भोजन प्रसाद पहुंचाया जा सके।






