संत समाज ने कहा—नर सेवा ही नारायण सेवा, आपदा पीड़ितों की मदद के लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा
हरिद्वार। नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक त्रासदी से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए संत समाज ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए मदद का हाथ बढ़ाया है। कनखल स्थित पंचायती श्री बड़ा उदासीन अखाड़े में तेरह संत अखाड़ों के संत महापुरुष एकत्रित हुए। इस दौरान नेपाल में हुई भीषण त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए आपदा प्रभावित लोगों की सहायता के लिए करीब 38 लाख रुपये की धनराशि एकत्रित की गई।
इस अवसर पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं पंचायती श्री महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्री महंत रवींद्र पुरी जी महाराज ने कहा कि ऐसी भीषण त्रासदी के समय हम सभी को आगे बढ़कर पीड़ित मानवता की सहायता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ के भाव से की गई सेवा मनुष्य के जीवन को सार्थक बनाती है और उसके भाग्य को उदय की ओर ले जाती है। जरूरत के समय किसी पीड़ित की सहायता करना ही सच्ची मानव सेवा है।
उन्होंने बताया कि संत समाज की ओर से नेपाल के आपदा प्रभावित लोगों की सहायता के लिए लगभग 51 लाख रुपये की धनराशि नेपाल में दी जाएगी। इसके अतिरिक्त राहत एवं सहायता कार्यों में भी संत समाज की ओर से हरसंभव सहयोग किया जाएगा।
इस अवसर पर प्रातः स्मरणीय परम पूज्य गुरु भगवान महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव महाराज ने कहा कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों का दर्द असहनीय है। हमारी मामूली-सी सहायता भी किसी पीड़ित की चोट पर मरहम लगाने का कार्य कर सकती है। मनुष्य को कभी भी जरूरतमंद की मदद करने से पीछे नहीं हटना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संत महापुरुषों का जीवन सदैव समाज को समर्पित रहता है। जगत कल्याण की भावना उनके मन में निरंतर बसी रहती है। संत महापुरुषों की ओर से नेपाल के आपदा पीड़ितों के लिए बढ़ाया गया मदद का हाथ ऐसा है, मानो किसी चोटिल व्यक्ति की चोट पर मरहम लगा दिया गया हो। उन्होंने कहा कि जितने अधिक हाथ सहायता के लिए आगे बढ़ेंगे, उतने ही अधिक आपदा पीड़ितों को राहत मिल सकेगी।
संत समाज ने नेपाल के आपदा प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में मानवता की सेवा सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने समाज के सक्षम लोगों से भी आगे बढ़कर पीड़ितों की सहायता करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर श्री महंत विष्णु दास महाराज, महंत राघवेंद्र दास महाराज, परम पूज्य करौली शंकर महाराज, महंत दामोदर दास महाराज, महंत कृष्ण स्वरूप महाराज, महान शिवानंद महाराज, महंत बांसीधर महाराज, श्री महंत भगत राम महाराज सहित बड़ी संख्या में संत महापुरुष एवं भक्तगण उपस्थित रहे।






