अडोल आश्रम में भक्ति, सेवा और श्रद्धा का दिव्य संगम – भव्य भजन-सत्संग एवं संत भंडारा सम्पन्न

🕉️ अडोल आश्रम में भक्ति, सेवा और श्रद्धा का दिव्य संगम – भव्य भजन-सत्संग एवं संत भंडारा सम्पन्न 🕉️
हरिद्वार के भूपतवाला स्थित पावन अडोल आश्रम में आज आध्यात्मिक ऊर्जा, भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। परम पूज्य महामंडलेश्वर श्री १००८ नित्यानंद पुरी जी महाराज की असीम कृपा से विशाल भजन-सत्संग चौकी कार्यक्रम एवं हजारों संत महापुरुषों के भव्य भंडारे का दिव्य आयोजन अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ।
प्रातःकाल से ही आश्रम परिसर भजन, कीर्तन और “जय श्रीराम” के मंगलमय जयघोष से गुंजायमान रहा। वातावरण इतना पवित्र और भावविभोर करने वाला था कि हर श्रद्धालु अपने आप को प्रभु भक्ति में लीन अनुभव कर रहा था। दूर-दूर से आए संत, महात्मा और श्रद्धालुओं ने इस पुण्य अवसर पर उपस्थित होकर धर्मलाभ अर्जित किया।
🌸 गुरुवाणी से मिला आत्मिक प्रकाश
प्रातःस्मरणीय महंत दुर्गा दास जी महाराज ने अपने अमृतमय वचनों से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्ग की ओर प्रेरित करते हुए कहा:
“जिस हृदय में प्रभु श्रीराम का वास होता है, वहाँ दुख, भय और अज्ञान का अंधकार टिक नहीं सकता।”
उन्होंने श्रीरामचरितमानस का प्रसिद्ध दोहा उद्धृत किया—
“रामहि केवल प्रेम पियारा, जानि लेहु जो जाननिहारा।”
अर्थात, प्रभु श्रीराम को केवल निष्कपट प्रेम ही प्रिय है। सच्चे मन से की गई भक्ति मनुष्य के जीवन को सुख, शांति और कल्याण से भर देती है।
🌼 गुरु कृपा ही जीवन का सच्चा प्रकाश
कार्यक्रम के प्रबंधक श्री विनोद शर्मा जी महाराज ने अपने पूज्य गुरुदेव की महिमा का गुणगान करते हुए कहा:
“गुरु ही वह दिव्य दीप हैं, जो जीवन के अंधकार को मिटाकर आत्मा को परमात्मा से जोड़ते हैं।”
उन्होंने बताया कि गुरु की कृपा के बिना आध्यात्मिक उन्नति संभव नहीं, और गुरु ही सच्चे मार्गदर्शक होते हैं।
🌺 भक्ति में भाव और सेवा का महत्व
महंत श्री प्रह्लाद दास जी महाराज ने भगवान श्रीराम की महिमा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। वहीं श्री हरीश कुमार गुलाटी जी ने अपने प्रेरणादायी विचारों में कहा:
“सच्ची भक्ति केवल मंदिरों तक सीमित नहीं होती, बल्कि सेवा, करुणा और मानवता के हर कार्य में भगवान का वास होता है।”

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