सर्वोदय सत्संग आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा का समापन, हवन-पूजन व भंडारे में उमड़े श्रद्धालु

सर्वोदय सत्संग आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा का समापन, हवन-पूजन व भंडारे में उमड़े श्रद्धालु

हरिद्वार। भारत माता मंदिर के सामने स्थित सर्वोदय सत्संग आश्रम में गुजरात से आए श्रद्धालु परिवार द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का रविवार को विधिवत समापन हुआ। समापन अवसर पर हवन-पूजन एवं भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। कथा व्यास सतीश भाई सेवक, लुनावाडा गुजरात ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराया।

कथा में गुजरात से आए करीब 50 से 60 श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया। आयोजनकर्ता मुकुंद राय दवे एवं राजू भाई ने बताया कि उन्होंने पहली बार सर्वोदय सत्संग आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया। उन्होंने कहा कि आश्रम का वातावरण उन्हें बेहद अच्छा लगा और पितरों के निमित्त आयोजित इस कथा के माध्यम से उन्होंने अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित की। उन्होंने कहा कि यह आयोजन पितरों के आशीर्वाद से संपन्न हुआ।

आयोजनकर्ताओं के अनुसार, आश्रम की ओर से कमरों एवं सत्संग हॉल के लिए जो किराया बताया गया, उसका उन्होंने नियमानुसार भुगतान किया। इसके अलावा कथा आयोजन के दौरान भंडारे सहित अन्य सभी व्यवस्थाओं का खर्च भी उन्होंने स्वयं वहन किया तथा आश्रम को दान-दक्षिणा भी प्रदान की।

आयोजनकर्ताओं ने बताया कि कथा के दौरान आश्रम में कुछ असुविधाएं भी सामने आईं, लेकिन उनका कहना था कि वे धार्मिक उद्देश्य से हरिद्वार आए थे, इसलिए उन्होंने इन असुविधाओं को नजरअंदाज करते हुए अपना पूरा ध्यान श्रीमद्भागवत कथा, भक्ति और पितरों के निमित्त किए जा रहे धार्मिक अनुष्ठान पर केंद्रित रखा।

आश्रम की व्यवस्था और किराये को लेकर उठे सवाल

वहीं, सर्वोदय सत्संग आश्रम की व्यवस्थाओं को लेकर कुछ गंभीर सवाल भी सामने आए हैं। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ अनधिकृत सदस्यों द्वारा धन प्राप्त करने के उद्देश्य से गुजरात से आए परिवार को कथा आयोजन के लिए आश्रम के 13 कमरे और सत्संग हॉल उपलब्ध कराया गया। बताया गया कि 13 कमरों का किराया 600 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से आठ दिनों के लिए लिया गया, जबकि सत्संग हॉल के लिए करीब 35 हजार रुपये किराया निर्धारित किया गया। इस प्रकार कमरे और हॉल के किराये से करीब एक लाख रुपये की राशि एकत्र होने की बात सामने आई है।

आरोप यह भी है कि कथा आयोजन के बाद गुजराती परिवार के भोजन एवं अन्य उपयोग का बचा हुआ सामान भी संबंधित सदस्यों को दे दिया गया, इस उद्देश्य से कि वह आश्रम के काम आ सके।

इन आरोपों और व्यवस्थाओं की वास्तविकता जानने के लिए मीडिया टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और आयोजन से जुड़े लोगों से जानकारी ली। हालांकि, आश्रम की कमेटी की वैधता, किराये की राशि और धन के उपयोग से जुड़े आरोपों पर संबंधित पक्ष का आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना अभी बाकी है।

सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर विधि-विधान से हवन-पूजन किया गया। इसके बाद भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। धार्मिक आयोजन के माध्यम से गुजरात से आए श्रद्धालुओं ने पितरों की शांति, परिवार की सुख-समृद्धि और सर्वकल्याण की कामना की।

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