“वन नेशन, वन इलेक्शन” पर कांग्रेस का भाजपा पर हमला, राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने साधा निशाना

हरिद्वार, 24 अगस्त। सोमवार को प्रेस क्लब सभागार में कांग्रेस की ओर से आयोजित पत्रकार वार्ता में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने “वन नेशन, वन इलेक्शन” के मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने इसे केवल चुनावी खर्च से जुड़ा विषय न बताते हुए देश के संघीय ढांचे, क्षेत्रीय दलों, लोकतांत्रिक जवाबदेही और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। प्रेस वार्ता में कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालेश्वर सिंह सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

आलोक शर्मा ने कहा कि भाजपा द्वारा धार्मिक मंचों का राजनीतिक इस्तेमाल किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस साधु-संतों और धर्माचार्यों का हमेशा सम्मान करती है, लेकिन यदि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से राजनीतिक बयानबाजी कर देश के मूल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास किया जाएगा, तो कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से उसका विरोध करेगी।

उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में हर राज्य और क्षेत्र की अपनी अलग-अलग समस्याएं और प्राथमिकताएं हैं। नगर निकाय, विधानसभा और लोकसभा चुनावों में जनता के सामने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक अलग-अलग मुद्दे होते हैं। ऐसे में सभी चुनाव एक साथ कराने पर राष्ट्रीय मुद्दों का प्रभाव स्थानीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर हावी हो सकता है।

संघीय ढांचे और जवाबदेही पर उठाए सवाल

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यदि किसी राज्य में चुनाव के बाद कार्यकाल के बीच सरकार गिर जाती है, तो ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति शासन की संभावना बढ़ सकती है। इससे केंद्र की शक्ति राज्यों की तुलना में अधिक मजबूत होने की आशंका है, जो भारतीय संघीय व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि “एक साथ चुनाव” का सबसे बड़ा असर सरकारों की जवाबदेही पर पड़ सकता है। वर्तमान व्यवस्था में जनता विधानसभा और लोकसभा चुनावों के माध्यम से अलग-अलग स्तर की सरकारों के कामकाज का मूल्यांकन करती है। स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी पार्षदों और नगर निकायों की होती है, जबकि विधायक और सांसद अपने-अपने स्तर पर जनता के प्रति जवाबदेह रहते हैं। सभी चुनाव एक साथ होने की स्थिति में यह जवाबदेही कमजोर पड़ने का खतरा है।

रामनाथ कोविंद समिति की रिपोर्ट का किया उल्लेख

आलोक शर्मा ने रामनाथ कोविंद समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि “वन नेशन, वन इलेक्शन” को लेकर अभी संसदीय प्रक्रिया जारी है और संयुक्त संसदीय समिति में भी इस विषय पर चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि इतनी महत्वपूर्ण संवैधानिक व्यवस्था पर जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय देश में व्यापक बहस होनी चाहिए और जनता को इसके सभी पहलुओं की पूरी जानकारी दी जानी चाहिए।

उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि पेपर लीक, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, कानून-व्यवस्था समेत अन्य गंभीर मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए बार-बार नए राजनीतिक विषय सामने लाए जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से चुनावी नारों के बजाय जनता की रोजमर्रा की समस्याओं पर जवाब देने की मांग की।

महंगाई और रोजगार के मुद्दे पर भी घेरा

कांग्रेस प्रवक्ता ने महंगाई और रोजगार को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने पेट्रोल, गैस सिलेंडर और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों का उल्लेख करते हुए सरकार से पूछा कि महंगाई कम करने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।

चुनावी फंडिंग और चुनाव सुधारों का मुद्दा उठाते हुए शर्मा ने कहा कि राजनीतिक चंदे और चुनावी फंडिंग में पारदर्शिता लोकतंत्र की बुनियादी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि चुनाव सुधारों की बात करने के बावजूद राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता को लेकर कई गंभीर सवाल अभी भी मौजूद हैं।

उत्तराखंड के मुद्दों को भी उठाया

आलोक शर्मा ने उत्तराखंड से जुड़े स्थानीय मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने अंकिता भंडारी प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की बेटी को न्याय दिलाने के सवाल पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

उन्होंने संत समाज से अपील की कि किसी भी राजनीतिक मंच का हिस्सा बनने से पहले संबंधित मुद्दों की पूरी सच्चाई और दस्तावेजों को समझें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस साधु-संतों का सम्मान करती है और उनके धार्मिक एवं सामाजिक योगदान को स्वीकार करती है, लेकिन धर्म के मंच को किसी राजनीतिक दल के प्रचार का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।

“भाजपा भारत नहीं है”: आलोक शर्मा

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “भाजपा भारत नहीं है, भाजपा हिंदुत्व नहीं है, सरकार भारत नहीं है और कोई एक व्यक्ति भारत नहीं है। भारत करोड़ों देशवासियों से मिलकर बना है।” उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी दल या व्यक्ति का वर्चस्व संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं से ऊपर नहीं हो सकता।

उन्होंने संत समाज से भी अपील की कि जब उनके सामने “वन नेशन, वन इलेक्शन” को लेकर तर्क रखे जाएं, तो वे संबंधित रिपोर्ट और दस्तावेजों का स्वयं अध्ययन करें तथा देशहित, संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक जवाबदेही के दृष्टिकोण से अपना मत बनाएं।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालेश्वर सिंह ने कहा कि कांग्रेस जनहित से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी और प्रदेश की जनता की आवाज को मजबूती से सामने रखेगी।

प्रेस वार्ता के अंत में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि “वन नेशन, वन इलेक्शन” पर अंतिम निर्णय जल्दबाजी में नहीं, बल्कि व्यापक संवैधानिक, राजनीतिक और सामाजिक विमर्श के बाद लिया जाना चाहिए। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र, संघीय ढांचे और सरकारों की जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को लेकर उसका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!