भूपतवाला, हरिद्वार में संत भंडारे का भव्य आयोजन, संतों ने दी गुरु महाराज को श्रद्धांजलि
हरिद्वार के भूपतवाला स्थित प्रसिद्ध श्री गोकुलधाम आश्रम में प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान श्री महंत लक्ष्मण दास जी महाराज की पावन स्मृति में एक विशाल संत भंडारे का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रातः स्मरणीय श्री महंत परमेश्वर दास जी महाराज के पावन सानिध्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर हरिद्वार के विभिन्न मठों, मंदिरों एवं आश्रमों से पधारे संत-महात्माओं ने श्रद्धापूर्वक भोजन प्रसाद ग्रहण कर गुरु महाराज को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में उपस्थित संतों ने गुरु परंपरा की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि गुरु का जीवन केवल व्यक्तिगत कल्याण के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज के आध्यात्मिक उत्थान हेतु समर्पित होता है। संत भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भी भाग लेकर पुण्य लाभ प्राप्त किया और भक्तिमय वातावरण में अपनी आस्था प्रकट की।
प्रातः स्मरणीय परम पूज्य श्री महंत परमेश्वर दास जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरु वह दिव्य शक्ति हैं, जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर आत्मा को परमात्मा के प्रकाश से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु के चरणों में समर्पित साधक जीवन के प्रत्येक संकट को सहजता से पार कर लेता है और गुरु कृपा ही भक्ति, ज्ञान एवं मोक्ष का सर्वोत्तम मार्ग प्रशस्त करती है।
इस अवसर पर श्री सुदर्शन आश्रम अखाड़े के महंत रघुवीर दास जी महाराज ने कहा कि गुरु का स्मरण ही साधक के जीवन की सबसे बड़ी साधना है। गुरु का आशीर्वाद मिलने पर असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं और जीवन में आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति होती है। वहीं महंत सूरज दास जी महाराज ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु सेवा से बढ़कर कोई तप नहीं और गुरु भक्ति से श्रेष्ठ कोई साधना नहीं। जो श्रद्धा और विश्वास के साथ गुरु के बताए मार्ग पर चलता है, उसके जीवन में सदैव सुख, शांति और सफलता का वास होता है।
महंत गणेश दास जी महाराज ने कहा कि संतों का सानिध्य और गुरु की वाणी मनुष्य के जीवन को पवित्र एवं संस्कारित बनाती है। गुरु के आदर्शों का अनुसरण करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है और यही मानव जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
कार्यक्रम का समापन संतों के आशीर्वचनों, सामूहिक प्रार्थना एवं प्रसाद वितरण के साथ भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं ने गुरु महाराज की पावन स्मृति को नमन करते हुए उनके बताए धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

