शरद पूर्णिमा पर संत-महात्माओं के सानिध्य में हुआ धार्मिक आयोजन, ब्रह्मलीन संतों की पावन स्मृति को किया नमन
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार के खड़खड़ी स्थित तीर्थ कुटीर आश्रम, बसंत गली में शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर ब्रह्मलीन सद्गुरुदेवों एवं संत-महात्माओं की पावन स्मृति में 60वें वार्षिक भंडारा एवं यज्ञ का भव्य आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ किया गया। इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों, यज्ञ की आहुतियों और संत-महात्माओं के सानिध्य से आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा।
कार्यक्रम में श्रीमत् परमहंस परिव्राजकाचार्य, श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ, सर्वदर्शनाचार्य, वेदालंकार ब्रह्मलीन सद्गुरुदेव महामंडलेश्वर स्वामी गंगेश्वरानंद जी महाराज, महामंडलेश्वर ब्रह्मलीन स्वामी श्री तीर्थानंद जी महाराज, ब्रह्मलीन स्वामी सर्वज्ञ मुनि जी महाराज, ब्रह्मलीन स्वामी गोपाल मुनि जी एवं स्वर्गीय शांति माता जी की पावन स्मृति में श्रद्धापूर्वक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए।
आयोजन के अंतर्गत 25 अक्टूबर को श्रीरामचरितमानस का अखंड पाठ प्रारंभ हुआ। सोमवार, 26 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर पूर्णाहुति एवं यज्ञ संपन्न किया गया। इसके उपरांत संत-महात्माओं के प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, अध्यात्म, सदाचार और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई। इसके पश्चात संत-सेवा एवं श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महामंडलेश्वर स्वामी भगवतस्वरूप जी महाराज वेदांताचार्य ने की। आयोजन का उद्देश्य ब्रह्मलीन महापुरुषों की स्मृतियों को अक्षुण्ण बनाए रखना तथा उनकी आध्यात्मिक शिक्षाओं, सेवा और परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाना रहा।
इस अवसर पर आश्रम से जुड़े श्रद्धालुओं ने ब्रह्मलीन संतों के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित कर उनका स्मरण किया। वार्षिक भंडारा केवल प्रसाद वितरण का आयोजन नहीं, बल्कि संत-सेवा, परोपकार, समर्पण और सनातन संस्कृति के प्रति आस्था का प्रतीक भी है। ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में सद्भाव, सेवा और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करते हैं।
निवेदक एवं दर्शनाभिलाषी: श्री पुरुषोत्तम कोछड़, महंत स्वामी प्रेमानंद जी के शिष्य, श्री धर्मपाल गुलाटी, महामंडलेश्वर ब्रह्मलीन सर्वदर्शनाचार्य स्वामी गंगेश्वरानंद जी महाराज तथा श्री श्यामबाबू (पप्पू) सहित आश्रम से जुड़े श्रद्धालु।
स्थान: तीर्थ कुटीर आश्रम (ट्रस्ट), बसंत गली, खड़खड़ी, हरिद्वार, उत्तराखंड।
शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित इस वार्षिक भंडारे ने संत परंपरा, गुरु-भक्ति और सेवा भाव की महत्ता को पुनः उजागर किया। संतों के आशीर्वाद और महापुरुषों की स्मृतियों के साथ यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का अवसर बना।






