राज्यपाल गुरमीत सिंह बोले—युवा तकनीक से प्रेम करें, लेकिन उसके उपयोग में मानवीय विवेक और नैतिकता को रखें सर्वोपरि
डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा—भारत की ज्ञान परंपरा तकनीकी विकास को मानव कल्याण से जोड़कर देखती रही है
हरिद्वार, 15 सितंबर। देव संस्कृति विश्वविद्यालय में मंगलवार को ‘एआई फॉर डेमोक्रेसी’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय समिट का आयोजन किया गया। समिट के समापन सत्र में मुख्य अतिथि उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने प्रतिभाग करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव, लोकतंत्र के सामने उभरती चुनौतियों और तकनीक के मानवीय उपयोग पर विस्तार से विचार रखे। कार्यक्रम में देश-विदेश से आए विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और नीति विशेषज्ञों ने एआई तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था के भविष्य पर मंथन किया।
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब केवल भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि वर्तमान को बदलने वाली महत्वपूर्ण शक्ति बन चुकी है। इसका उपयोग जनहित, सुशासन और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि एआई शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, प्रशासन और सार्वजनिक सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने तथा नागरिकों को उनकी अपनी भाषा में सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। हालांकि, तकनीकी विकास के साथ पारदर्शिता, सत्य और जिम्मेदारी भी जरूरी है। एआई में किसी भी प्रकार का पक्षपात समाज में असमानता को बढ़ा सकता है।
राज्यपाल ने कहा कि नागरिकों के अधिकारों से जुड़े मामलों में मानवीय जिम्मेदारी सर्वोपरि है। एआई निर्णय लेने में सहायता कर सकती है, लेकिन मानवीय विवेक और जिम्मेदारी का स्थान नहीं ले सकती। न्याय व्यवस्था में भी एआई का उपयोग सहायक तकनीक के रूप में किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा हमें यह सिखाती है कि ज्ञान का अंतिम उद्देश्य लोक कल्याण होना चाहिए।
उत्तराखंड में एआई के व्यापक उपयोग की संभावनाएं
उत्तराखंड के संदर्भ में राज्यपाल ने कहा कि एआई का उपयोग आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि एवं बागवानी, पर्यावरण संरक्षण, चारधाम यात्रा और भीड़ प्रबंधन जैसी गतिविधियों में प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तकनीक की सफलता का वास्तविक पैमाना यही है कि उससे आम लोगों का जीवन कितना बेहतर हुआ।
युवाओं का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को तकनीक सीखने और नवाचार करने के साथ यह भी समझना होगा कि किसी तकनीक से ‘क्या किया जा सकता है’ के साथ-साथ ‘क्या किया जाना चाहिए’। उन्होंने कहा कि एआई मानवता को बांटने वाली नहीं, बल्कि जोड़ने वाली शक्ति बने। ज्ञान के साथ विवेक, तकनीक के साथ नैतिकता और नवाचार के साथ जिम्मेदारी ही एआई के बेहतर उपयोग का आधार होना चाहिए।
लोकतांत्रिक संस्थाओं के सामने नई संभावनाएं और चुनौतियां
इस अवसर पर अपने वीडियो संदेश में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि एआई के विकास के साथ लोकतांत्रिक संस्थाओं के सामने नई संभावनाएं और चुनौतियां दोनों सामने आ रही हैं। एआई का उपयोग पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी बढ़ाने तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीक का विकास मानव हित और लोकतांत्रिक मूल्यों को केंद्र में रखकर किया जाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि लोकसभा में भी एआई का उपयोग किया जा रहा है।
मानवीय मूल्यों से जुड़ा एआई लोकतंत्र को बनाएगा अधिक संवेदनशील
समिट की अध्यक्षता कर रहे देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा तकनीकी विकास को हमेशा मानव कल्याण से जोड़कर देखती रही है। एआई को मानव बुद्धि का विकल्प नहीं, बल्कि मानव क्षमता के विस्तार का माध्यम बनाना होगा। उन्होंने कहा कि मानवीय मूल्यों से जुड़ा एआई ही लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील, समावेशी और जनकेंद्रित बना सकता है।
लंदन स्थित सेंटर फॉर टुमॉरो के संस्थापक अध्यक्ष डेक्स हंटर टोरिक ने कहा कि एआई का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए तकनीकी विकास के साथ सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों पर भी ध्यान देना आवश्यक है। सरकार, उद्योग और समुदाय को मिलकर ऐसी तैयारी करनी होगी, जिससे एआई समान अवसर, मानव कल्याण और समावेशी विकास का आधार बन सके।
प्रतियोगिताओं के विजेताओं का हुआ सम्मान, पुस्तकों का विमोचन
समिट के विभिन्न सत्रों में एआई, लोकतांत्रिक संस्थाओं, सार्वजनिक नीति, नागरिक भागीदारी, डिजिटल विश्वसनीयता और भविष्य की शासन व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। इस अवसर पर ‘एआई फॉर डेमोक्रेसी’ विषय पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया।
समिट के दौरान एआई आधारित पत्रिका सहित अनेक पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में देश-विदेश के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोगों ने सहभागिता की।
समिट में आईपीयू जेनेवा की महासचिव एण्डा फिलिप, द ब्रिटिश यूनिवर्सिटी इन इजिप्ट के डीन प्रो. इब्राहिम सलामा, सेंटर फॉर टुमॉरो के संस्थापक अध्यक्ष एवं एआई और पब्लिक पॉलिसी विशेषज्ञ डेक्स हंटर टोरिक, ब्रिटिश हाई कमीशन नई दिल्ली के टेक पॉलिसी प्रमुख हैरी फिशर, स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. विजय धस्माना, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, मनु गौड़ सहित देश-विदेश के अनेक विशेषज्ञ एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।






