बेल्जियम के एंटवर्प में गूंजा वैदिक स्वर—डॉ. चिन्मय पंड्या ने कराया भव्य गायत्री दीपमहायज्ञ

बेल्जियम के एंटवर्प में गूंजा वैदिक स्वर—डॉ. चिन्मय पंड्या ने कराया भव्य गायत्री दीपमहायज्ञ
हरिद्वार, 20 अप्रैल। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज के युवा प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पंड्या ने बेल्जियम के ऐतिहासिक नगर एंटवर्प में भव्य गायत्री दीपमहायज्ञ का संचालन कर भारतीय संस्कृति की वैश्विक छवि को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया। विदेशी धरती पर आयोजित इस दिव्य अनुष्ठान ने वैदिक परंपराओं की गरिमा, आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक वैभव को जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम स्थल दीपों की स्वर्णिम आभा और वैदिक मंत्रोच्चार की पवित्र ध्वनियों से आलोकित हो उठा। जलते हुए प्रत्येक दीप से मानो विश्वशांति, वैश्विक सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय मूल्यों के पुनर्जागरण का संदेश प्रसारित हो रहा था।
इस अवसर पर बेल्जियम के युवा, महिलाएं, पुरुष और अनेक गणमान्य नागरिक बड़ी श्रद्धा के साथ दीपमहायज्ञ में शामिल हुए। उनकी उत्साहपूर्ण सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय अध्यात्म और सनातन जीवन-दर्शन आज विश्वभर में प्रेरणा का स्रोत बन चुका है।
दीपमहायज्ञ के दौरान अपने प्रेरक उद्बोधन में डॉ. पंड्या ने कहा कि दीप केवल प्रकाश का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मपरिष्कार, सेवा और समर्पण का संदेश है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब व्यक्ति अपने भीतर के अज्ञान, स्वार्थ और संकीर्णता को दूर कर लोकमंगल की दिशा में आगे बढ़ता है, तभी दीपयज्ञ का वास्तविक उद्देश्य पूर्ण होता है।
कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित जनों ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को आत्मसात करते हुए विश्वबंधुत्व और मानव कल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। बेल्जियम की धरती पर आयोजित यह भव्य दीपमहायज्ञ भारतीय संस्कृति की वैश्विक प्रतिष्ठा और आध्यात्मिक चेतना का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।

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