हरिद्वार। हरिद्वार की पावन धरती पर चैत्र नवरात्र के अवसर पर मां चामुंडा देवी की परंपरागत शोभायात्रा के दौरान विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार श्रद्धालु मां चामुंडा देवी मंदिर (सोनार कोठी, शिवालिक वन क्षेत्र) में घट स्थापना के लिए शोभायात्रा निकालते हैं।
इस वर्ष भी यह शोभायात्रा हर की पौड़ी से शुरू होकर बिल्केश्वर महादेव मंदिर की ओर बढ़ रही थी। शोभायात्रा का नेतृत्व सुनील शर्मा कर रहे थे और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल थे।
🚫 वन विभाग ने रास्ते में रोकी यात्रा
जब शोभायात्रा बिल्केश्वर क्षेत्र के पास पहुंची, तो वन विभाग के कर्मचारियों ने इसे आगे बढ़ने से रोक दिया। बताया जा रहा है कि पिछले वर्षों की तरह इस बार भी जंगल क्षेत्र में प्रवेश को लेकर आपत्ति जताई गई। इस दौरान श्रद्धालुओं और वन विभाग के अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक और गर्मा-गर्मी की स्थिति बन गई।
⚖️ विवाद के बाद निकला समाधान
काफी देर तक चले विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी। वन विभाग के अधिकारियों ने कलश को आगे ले जाने की अनुमति नहीं दी, लेकिन उसे बिल्केश्वर महादेव मंदिर में ही विधिवत स्थापित करा दिया गया। इसके बाद शोभायात्रा को वहीं रोक दिया गया।
🙏 बड़ी संख्या में शामिल हुए श्रद्धालु
इस शोभायात्रा में दिनेश शर्मा, सचिन पंडित, संदीप नाथ, नवीन, तोताराम, जयकुमार, अतुल शर्मा, रिंकू, श्रीराम भारद्वाज, पंडित सुदामा सहित अनेक भक्तगण उपस्थित रहे। वन विभाग की ओर से डिप्टी रेंजर और अन्य अधिकारी मौके पर तैनात रहे और स्थिति को नियंत्रित किया।
🌄 मां चामुंडा देवी सिद्ध पीठ का आध्यात्मिक महत्व
हरिद्वार में नील और बिल्व पर्वत के मध्य बहती मां गंगा के बीच स्थित सोनार कोठी क्षेत्र में मां चामुंडा देवी का प्राचीन सिद्ध पीठ स्थित है। यह स्थान स्कंद पुराण और देवी भागवत पुराण में वर्णित शक्तिपीठों में महत्वपूर्ण माना जाता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी ने चण्ड और मुण्ड नामक असुरों का वध यहीं किया था, जिसके कारण उन्हें “चामुंडा” नाम से जाना गया। यह स्थान साधना, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है।
⚠️ आस्था बनाम प्रशासन—उठे सवाल
शोभायात्रा को बार-बार रोके जाने को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं में नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि परंपराओं और आस्था के आयोजन में इस प्रकार की बाधाएं नहीं आनी चाहिए। वहीं प्रशासन का पक्ष वन क्षेत्र की सुरक्षा और नियमों का पालन बताता है।
👉 कुल मिलाकर, हरिद्वार की इस घटना ने एक बार फिर आस्था और प्रशासनिक नियमों के बीच संतुलन को लेकर चर्चा छेड़ दी है।
हरिद्वार में शोभायात्रा रोके जाने पर विवाद, बाद में बिल्केश्वर मंदिर में स्थापित हुआ कलश

