जगद्गुरु आदि शंकराचार्य जी की 1238वीं जयंती महोत्सव श्रद्धा एवं भक्ति के साथ संपन्न
आदि शंकराचार्य की 1238वीं जयंती के पावन अवसर पर हरिद्वार के कनखल स्थित श्रीकृष्ण निवास आश्रम में भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 8 बजे शंकराचार्य चौक पर विधिवत पूजन एवं अभिषेक से हुई। इसके पश्चात हर की पौड़ी पर जूना अखाड़ा के महामंत्री श्रीमहंत केरादपुरी जी महाराज द्वारा जगद्गुरु आदि शंकराचार्य जी का उनके चारों शिष्यों सहित पारंपरिक पूजन-अभिषेक किया गया।
इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता पूज्य पूज्य महामंडलेश्वर 1008 स्वामी गिरधर गिरि जी महाराज ने की। सभा में मुख्य रूप से जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज एवं परम श्रद्धेय महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति रही।
प्रातः 10 बजे आयोजित श्रद्धांजलि सभा में संत-महात्माओं ने आदि शंकराचार्य जी के अद्वैत वेदांत के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए उनके द्वारा दिए गए महान संदेश— “ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या, जीवो ब्रह्मैव नापरः”—का स्मरण किया।
सभा के उपरांत दोपहर 12 बजे विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संतगण, श्रद्धालु एवं भक्तजन उपस्थित होकर प्रसाद ग्रहण किया।
वैशाख शुक्ल पंचमी, मंगलवार 21 अप्रैल 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में समस्त संत समाज एवं भक्तों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का सफल संचालन जगद्गुरु आदि शंकराचार्य स्मारक समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों द्वारा किया गया।
यह आयोजन श्रद्धा, आध्यात्मिकता और भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पण का अद्भुत उदाहरण रहा।
जगद्गुरु आदि शंकराचार्य जी की 1238वीं जयंती महोत्सव श्रद्धा एवं भक्ति के साथ संपन्न

