हरिद्वार: सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में अल्पायु से ही अपना अमूल्य योगदान देने वाली साध्वी प्रेम बाईसा का आकस्मिक निधन हो गया। यह समाचार न केवल उनके अनुयायियों बल्कि समस्त सनातन समाज के लिए अत्यंत दुखद और स्तब्ध कर देने वाला है। कमल के समान मुस्कुराता हुआ चेहरा, शांत स्वभाव और ओजस्वी वाणी से लोगों के हृदय में धर्म की ज्योति प्रज्वलित करने वाली वह बालिका आज ईश्वर के चरणों में विलीन हो गई।
छोटी-सी आयु में कथा वाचन के माध्यम से साध्वी प्रेम बाईसा ने सनातन धर्म की गूढ़ शिक्षाओं को सरल शब्दों में जन-जन तक पहुँचाया। उनकी कथाओं में भक्ति, संस्कार और धर्म का अनूठा संगम देखने को मिलता था। वे न केवल एक कथा वाचक थीं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी थीं।
उनके असमय निधन की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। संत-समाज, श्रद्धालु, अनुयायी और सामाजिक संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे सनातन धर्म के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। सभी की आँखें नम हैं और मन में एक ही प्रश्न है कि इतनी अल्पायु में यह दीपक क्यों बुझ गया।
ईश्वर ने अपनी प्रिय भक्त को अपने पास बुला लिया, लेकिन साध्वी प्रेम बाईसा द्वारा दिया गया धर्म, भक्ति और संस्कारों का संदेश सदैव जीवित रहेगा। उनका जीवन भले ही छोटा रहा हो, पर उनका योगदान अत्यंत विशाल और स्मरणीय रहेगा।
हृदय विदारक घटना: सनातन धर्म प्रेमी जोधपुर की कथा वाचक साध्वी प्रेम बाईसा का निधन, कमल-सी मुस्कान हमेशा के लिए हुई मौन

