हरिद्वार: प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी के साथ प्रशासन द्वारा किए गए कथित अभद्र व्यवहार की गूँज अब तीर्थ नगरी हरिद्वार तक पहुँच गई है। आज हरिद्वार के प्रतिष्ठित तीर्थ पुरोहितों, ब्राह्मणों और साधु-संतों ने इस अपमान के विरोध में विश्व प्रसिद्ध हर की पौड़ी पर जोरदार धरना प्रदर्शन किया।
विदित हो कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पिछले दो दिनों से प्रयागराज माघ मेले में अनशन पर बैठे हैं। उनकी मांग है कि उनके और संतों के साथ जो दुर्व्यवहार किया गया है, उसके लिए प्रशासन सार्वजनिक रूप से माफी मांगे।
आज सुबह बड़ी संख्या में ब्राह्मण और संत समाज के लोग हर की पौड़ी के ब्रह्मकुंड पर एकत्रित हुए। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि शंकराचार्य हिंदू धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु हैं और उनका अपमान पूरे सनातन धर्म का अपमान है।
सार्वजनिक माफी: संतों ने मांग की है कि प्रयागराज मेला प्रशासन और संबंधित अधिकारी तुरंत शंकराचार्य से अपने व्यवहार के लिए माफी मांगें।
धार्मिक मर्यादा का सम्मान: प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में सनातन धर्म के ध्वजवाहकों के साथ ऐसा व्यवहार हुआ, तो पूरे देश में आंदोलन किया जाएगा।
हरिद्वार के संतों ने स्पष्ट किया कि वे शंकराचार्य की मांगों के साथ पूरी तरह खड़े हैं।
प्रदर्शन में शामिल तीर्थ पुरोहितों ने कहा, “प्रयागराज की पावन धरती पर जहाँ संतों का सम्मान होना चाहिए, वहाँ प्रशासन का तानाशाही रवैया असहनीय है। जब तक शंकराचार्य जी का मान-सम्मान वापस नहीं मिलता, हम चैन से नहीं बैठेंगे।”
इस विरोध प्रदर्शन के कारण हर की पौड़ी पर कुछ समय के लिए गहमागहमी बनी रही। संतों ने जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को ज्ञापन भेजने का भी निर्णय लिया है। प्रशासन की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन हरिद्वार के संतों ने साफ कर दिया है कि वे इस लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाएंगे।
प्रयागराज माघ मेला विवाद: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान के खिलाफ हरिद्वार में संतों का फूटा गुस्सा, हर की पौड़ी पर धरना प्रदर्शन

