हरिद्वार : तीर्थ नगरी हरिद्वार स्थित अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज के वैरागी कैंप में आयोजित कार्यक्रम आज एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक उत्सव का साक्षी बना। परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के तप के 100 वर्ष पूज्य गुरुदेव जी की साधना के १०० वर्ष पूर्ण एवं अखंड दीपक के प्राकट्य के १०० वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘शताब्दी समारोह 2026’ के अंतर्गत ‘ध्वज वंदन’ और ‘वसुधा वंदन’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।राष्ट्र और संस्कृति के प्रति समर्पित आयोजन समारोह का शुभारंभ मुख्यमंत्री द्वारा शांतिकुंज के पावन परिसर में गायत्री परिवार के ध्वज का आरोहण कर किया गया। इसके पश्चात ‘वसुधा वंदन’ कार्यक्रम के तहत धरती माता के संरक्षण और पर्यावरण शुद्धि का संकल्प लिया गया। मुख्यमंत्री ने देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के आचार्यों और शांतिकुंज के व्यवस्थापकों के साथ मिलकर पौधरोपण भी किया।मुख्यमंत्री का संबोधन जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “शांतिकुंज केवल एक संस्था नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों और भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का केंद्र है। माता भगवती देवी शर्मा जी का जीवन नारी शक्ति और तपस्या का साक्षात उदाहरण है। उनके तप के 100 वर्ष पूर्ण होना संपूर्ण राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है।” उन्होंने आगे कहा कि शांतिकुंज द्वारा चलाए जा रहे व्यसनमुक्ति और स्वच्छता अभियान ‘विकसित भारत’ के संकल्प को सिद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।भक्तिमय हुआ वातावर शताब्दी समारोह के चलते पूरे शांतिकुंज परिसर को फूलों और दीपों से सजाया गया था। देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में वातावरण ‘गायत्री मंत्र’ और ‘जयघोष’ से गुंजायमान रहा। गायत्री परिवार के प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पंड्या और श्रद्धेया शैल दीदी ने मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया और आगामी योजनाओं पर चर्चा की।शताब्दी संकल्प इस अवसर पर शांतिकुंज द्वारा 2026 को ‘युग निर्माण वर्ष’ के रूप में मनाने का संकल्प लिया गया, जिसके तहत करोड़ों गायत्री साधक वैश्विक शांति और सद्भावना के लिए कार्य करेंगे।
शताब्दी समारोह 2026 में उमड़ा आस्था का सैलाब: माता भगवती देवी शर्मा एवं गुरुदेव जी की साधना के 100 वर्ष पूर्ण, ‘ध्वज वंदन और वसुधा वंदन’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जी ने किया आगमन

