हिमालयात् समारभ्य यावत् इन्दु सरोवरम्।
तं देवनिर्मितं देशं हिन्दुस्थानं प्रचक्षते॥
{भावार्थ – हिमालय से प्रारम्भ होकर इन्दु सरोवर तक देवताओं द्वारा निर्मित यह देश हिन्दुस्थान कहलाता है।}
प्रसिद्ध संस्कृत सूक्ति “संघे शक्तिः कलौ युगे” को चरितार्थ कर, एकात्मकता का संचार करने के उद्देश्य से देश की राजधानी दिल्ली स्थित, तालकटोरा स्टेडियम में विश्व हिन्दू महासंघ के तत्वावधान में विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन आहूत किया गया जहाँ तप-साधना-करुणा-क्षमा-भक्ति-विनम्रता आदि अन्यान्य गुणों को धारण करने वाले परम पूज्य गुरुदेव आनन्दपीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर अनंत श्री विभूषित श्री श्री 1008 स्वामी बालकानन्द गिरि जी महाराज श्री की पावन उपस्थिति रही।
कालकापीठाधीश्वर श्री सुरेंद्र नाथ अवधूत जी महाराज (राष्ट्रीय अध्यक्ष : विश्व हिन्दू महासंघ) जी के भव्य आयोजन में अखिल भारतीय अखाडा परिषद् के अध्यक्ष श्री महंत रवींद्र पुरी जी महाराज (अध्यक्ष : श्री माँ मनसा देवी ट्रस्ट) की अध्यक्षता में एवं “पूज्य महाराज श्री” की उपस्थिति में आयोजित इस महत्वपूर्ण एवं दिव्य समारोह में देश-विदेश से हिंदुत्व की सेवा में संलग्न धर्म सेवियों का आगमन हुआ। कार्यक्रम स्थल के द्वार पर पूज्य गुरूवर के पधारने पर स्वस्ति मंत्रो से युक्त, पुष्प माला, तिलक एवं आरती द्वारा स्वागत की शास्त्रीय परम्परा का निर्वहन प्रशंसनीय रहा।
अनेक विद्वजनों से सुसज्जित इस पावन कार्यक्रम का भाषा की प्रवीणता, शब्दों की सटीकता एवं रसना की माधुर्यता से सिक्त वैविध्य पूर्ण सरस संचालन आचार्य सुभेश शर्मन जी द्वारा किया गया जिसमें नेपाल से पधारीं, विश्व हिन्दू महासंघ की अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्षा आदरणीया स्मिता भंडारी जी, महिला आयोग उत्तर प्रदेश की अध्यक्षा डॉ बबिता चौहान जी, श्री दूधेश्वरपीठाधीश्वर श्री महंत नारायण गिरि जी महाराज, लोकसभा सांसद एवं प्रसिद्ध भोजपुरी अभिनेता श्री मनोज तिवारी जी,श्रीमान तेजपाल योगी जी, महामण्डलेश्वर स्वामी श्री नवलकिशोर दास जी महाराज जैसे महानुभावों की गरिमामयी उपस्थिति रही जहाँ पर श्री विक्रम गोस्वामी जी के कुशल प्रबंधन में सभी अभ्यागतों का सभागार परिसर में अंगवस्त्रम, स्मृति चिह्न, पुष्प हार आदि द्रव्यों के माध्यम से सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित अनेकानेक धर्म प्रेमियों को सम्बोधित करते हुए पूज्य गुरुदेव ने “हिन्दव: सोदरा: सर्वे, न हिन्दू पतितो भवेत्” की भावना को सम्प्रेषित करते हुए प्रत्येक सनातनी को संगठित रहने एवं धर्मानुसार आचरण करने का सन्देश दिया।

