हरिद्वार: श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन अखाड़ा में विशाल भंडारे का भव्य आयोजन
संत-समागम और सेवा का अनुपम उदाहरण
आज श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन अखाड़ा में एक विशाल भंडारे का भव्य आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर देशभर के विभिन्न अखाड़ों एवं एवीएन आश्रमों से पधारे संतगण, साथ ही बड़ी संख्या में संत एवं भक्तजन उपस्थित रहे। पूरे वातावरण में भक्ति, सेवा और सनातन संस्कृति की दिव्य छटा देखने को मिली।
सत्य और सेवा के मार्ग पर चलने का संदेश
भंडारे में उपस्थित संतों ने अपने उद्बोधन में कहा कि
मानव जीवन का उद्देश्य सदैव सत्य की राह पर चलना और समय-समय पर सभी की सहायता करना है।
संतों ने यह भी कहा कि भंडारे, दान-पुण्य और सेवा कार्य समाज में समरसता और धर्म की जड़ें मजबूत करते हैं, इसलिए ऐसे कार्य निरंतर होते रहने चाहिए।
महंत सूर्यांश मुनि जी का प्रेरणादायी उद्बोधन
अखाड़े के महंत पूज्य सूर्यांश मुनि जी महाराज ने अपने ओजस्वी विचार रखते हुए कहा कि—
यह मानव जीवन हमें भक्ति के मार्ग पर चलने, सनातन धर्म को आगे बढ़ाने और उसके मूल्यों का प्रचार-प्रसार करने के लिए मिला है।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म शाश्वत है, और इसे आगे ले जाना प्रत्येक सनातनी का कर्तव्य है।
गुरु परंपरा से मिली जीवन की सही दिशा
महंत सूर्यांश मुनि जी महाराज ने यह भी कहा कि
हमारे गुरुओं ने हमें सिखाया है कि धर्म के कार्यों से ही जीवन को सही दिशा मिलती है।
आने वाली पीढ़ी और भविष्य में बनने वाले वीडियो संदेशों के माध्यम से भी यही संदेश दिया जाएगा कि—
धर्म के मार्ग पर चलते रहें, सेवा करें और सनातन धर्म को सदैव आगे बढ़ाते रहें।
भक्ति, सेवा और सनातन चेतना का संगम
यह विशाल भंडारा न केवल सेवा का उदाहरण बना, बल्कि सनातन धर्म की एकता, गुरु परंपरा और सामाजिक जिम्मेदारी का भी सशक्त संदेश देकर गया।
कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं ने धर्म, सेवा और सत्य के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन अखाड़ा में विशाल भंडारे का भव्य आयोजन

