पुलिस पर झूठे आरोप लगाने के मामले में व्यक्ति को कानूनी नोटिस संतोषजनक जवाब न मिलने पर दर्ज होगी एफआईआर : एडवोकेट मयंक त्यागी

पूजा शर्मा: रिपोर्टर
हरिद्वार।
पुलिस पर झूठे आरोप लगाकर समाज में भ्रम और नकारात्मक माहौल फैलाने के आरोप में भरत पंजावनी पुत्र ज्ञानचंद, निवासी फ्लैट नंबर-30, पंचायती आखाड़ा उदासीन, छावनी कनखल, हरिद्वार को कानूनी नोटिस भेजा गया है। यह नोटिस एडवोकेट मयंक त्यागी द्वारा भेजा गया है।
बताया गया कि दिनांक 29 जनवरी 2026 को भरत पंजावनी ने हाथ में प्लास्टर लगाकर पुलिस पर आरोप लगाया कि 27 जनवरी 2026 को रोडीबेल पुलिस चौकी, हरिद्वार में उसके साथ मारपीट की गई और उसका हाथ तोड़ दिया गया।
हालांकि, 28 जनवरी 2026 को नगर कोतवाली के सामने स्थित एक दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में भरत पंजावनी पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में चलते-फिरते दिखाई दे रहा है, जिसमें उसके हाथ में किसी भी प्रकार की चोट या प्लास्टर नहीं पाया गया।
आरोप है कि भरत पंजावनी ने जानबूझकर पुलिस पर झूठे आरोप लगाए, जिससे समाज में पुलिस के प्रति नफरत फैले और पुलिस की छवि को नुकसान पहुँचे। साथ ही, इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी पुलिस के विरुद्ध दुष्प्रचार किया गया।
सूत्रों के अनुसार, भरत पंजावनी का आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है। बीते दो महीनों के भीतर उसके खिलाफ शांति भंग के दो मामले, मारपीट, गाली-गलौच, जान से मारने की धमकी, वाहन को नुकसान पहुँचाने तथा चालक से जबरन पैसे मांगने जैसे मामलों सहित कुल चार मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
एडवोकेट मयंक त्यागी ने बताया कि भरत पंजावनी द्वारा किए गए आपराधिक कृत्यों से संबंधित सभी साक्ष्य सुरक्षित रूप से उपलब्ध हैं। पुलिस पर झूठे आरोप लगाकर समाज में रोष उत्पन्न करने के संबंध में दिनांक 3 फरवरी 2026 को उसे कानूनी नोटिस भेजा गया है, जिसमें 7 दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब मांगा गया है।
यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं होता है, तो भरत पंजावनी के विरुद्ध हरिद्वार न्यायालय में संबंधित धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।

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