सरकारी भूमि खुर्दबुर्द के विरोध में उठी आवाज दबाने की साजिश का आरोप, गोलीकांड को बताया पूर्व नियोजित

हरिद्वार। कई सौ करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी भूमि को खुर्दबुर्द किए जाने के विरोध में आवाज उठाने पर एक सामाजिक कार्यकर्ता को फंसाने की साजिश रचे जाने का आरोप सामने आया है। भाजपा से जुड़े दो गुटों के बीच हुए कथित गोलीकांड को लेकर अब शिकायतकर्ता पक्ष ने इसे पूरी तरह पूर्व नियोजित षड्यंत्र बताया है।
गोलीकांड के आरोपित अतुल चौहान की पत्नी दीपशिखा चौहान ने प्रेस क्लब हरिद्वार में पत्रकारों से वार्ता करते हुए जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित चौहान पर अपने रसूख का दुरुपयोग करने और प्रशासन के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से पूरे घटनाक्रम की पटकथा पहले से लिखे जाने का गंभीर आरोप लगाया।
दीपशिखा चौहान ने बताया कि उनके पति अतुल चौहान द्वारा ग्राम नूरपुर पंजनहेडी में बागों की अवैध कटाई, कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग और सरकारी भूमि कब्जाने को लेकर लंबे समय से प्रशासन, हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण और उच्च न्यायालय नैनीताल में शिकायतें की जा रही थीं। इसी कारण भू-माफिया और जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित चौहान सहित अन्य लोग उनके पति से रंजिश रखने लगे और उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं।
उन्होंने बताया कि 28 जनवरी 2026 को प्रशासनिक आदेश पर खसरा संख्या 154 व 158 की पैमाइश होनी थी, जिसके लिए तहसीलदार व लेखपाल द्वारा अतुल चौहान को मौके पर बुलाया गया। आरोप है कि जब अतुल चौहान अपने भतीजे के साथ मौके पर पहुंचे तो वहां पहले से ही अमित चौहान, सचिन चौहान सहित कई लोग लाठी-डंडों और अवैध हथियारों के साथ मौजूद थे और उन्होंने जान से मारने की नीयत से हमला कर दिया।
दीपशिखा का दावा है कि अपने बचाव में अतुल चौहान ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से केवल हवाई और जमीन की ओर फायरिंग की तथा किसी को भी गोली नहीं मारी। इसके बाद वह स्वयं कनखल थाने जाकर आत्मसमर्पण करने पहुंचे।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद राजनीतिक दबाव में यह प्रचारित किया गया कि जिला पंचायत उपाध्यक्ष के भाई को गोली लगी है, जबकि वीडियो फुटेज में कथित घायल व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ हालत में चलता-फिरता और फोन पर बात करता दिखाई दे रहा है।
दीपशिखा चौहान ने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि घटना के बाद पुलिस ने उनके नाबालिग बेटे को जबरन घर से उठा लिया और उसके साथ मारपीट की। उनका बेटा राष्ट्रीय स्तर का आर्चरी खिलाड़ी है और घटना से उसका कोई संबंध नहीं था। पिटाई के कारण आई चोटों की पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट में भी हुई है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान सादे कपड़ों में एक कथित पेशेवर अपराधी भी मौजूद था।
उन्होंने बताया कि उनकी शिकायत पर पुलिस ने जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित चौहान सहित 6-7 लोगों के खिलाफ मुकदमा तो दर्ज कर लिया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है और आरोपी खुलेआम गांव में घूमकर दहशत फैला रहे हैं।
दीपशिखा चौहान ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी तथा नाबालिग बेटे के साथ मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ मारपीट या गोलीकांड का नहीं, बल्कि सैकड़ों करोड़ की सरकारी भूमि को बचाने की लड़ाई से जुड़ा है, जिसे कमजोर करने के लिए यह साजिश रची गई।

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